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सांदीपनि स्कूलों की हकीकत:कागज़ों में हाईटेक स्कूल, जमीन पर अधूरे ढांचे

 


परियोजना की सबसे बड़ी नाकामी उजागर, अब तक 400 करोड़ हो चुके खर्च,जिम्मेदार मौन

जबलपुर। हाईटेक सरकारी स्कूलों का सपना चार साल बाद भी अधूरा ही दिख रहा है। 2021 में शुरू हुई संदीपनि (सीएम राइज) विद्यालय परियोजना पर 350 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन अपेक्षित प्रगति अब तक नजर नहीं आई। जिले के 10 संदीपनि विद्यालयों में से केवल 3 विद्यालयों का भवन आंशिक रूप से तैयार हो पाया है, जबकि बाकी का निर्माण अधूरे ढांचे की तरह खड़ा है। सबसे बड़ा और मॉडल कैम्पस माना जा रहा गोराबाज़ार संदीपनि विद्यालय, जो अभी निर्माण के मध्य चरण में भी नहीं पहुंच सका। निर्माण एजेंसी एमपीआईडीसी की धीमी गति के चलते इसके 2026–27 तक लटकने की आशंका प्रबल हो गई है। विद्यालयों में स्मार्ट-क्लास, साइंस लैब, फर्नीचर, इलेक्ट्रिकल वर्क, सुरक्षा-प्रणाली से लेकर खेल मैदान तक अधिकांश सुविधाएँ अधूरी हैं। कई जगहों पर छत का काम, टाइल्स, पेंटिंग और नेटवर्किंग का कार्य शुरू भी नहीं हुआ। कुछ विद्यालयों में छात्र अस्थायी कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं।

-बसें आ गईं, पर रुट तय नहीं

बसें खरीदी जा चुकी,पर रूट और संचालन व्यवस्था आज तक तय नहीं हो पाई है, जिससे छात्रों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों में भी देरी को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

- निर्माण की सुस्ती,4 साल बाद भी अधूरा काम

350 करोड़ की परियोजना में केवल 3 विद्यालय तैयार

गोराबाज़ार सहित 7 स्कूलों का मुख्य भवन अधूरा

एमपीआईडीसी की धीमी रफ्तार, कई बार डेडलाइन बढ़ाना पड़ा

लैब, लाइब्रेरी, स्मार्ट-क्लास, फर्नीचर, वायरिंग अधूरी

2026–27 तक निर्माण खिंचने की संभावना

-सुविधाएँ अधूरी, छात्र प्रभावित

कई स्कूलों में अस्थायी कक्षाओं में पढ़ाई

बस सेवा अभी तक पूरी तरह शुरू नहीं

स्मार्ट-क्लास और साइंस लैब उपलब्ध नहीं

खेल मैदान, ऑडिटोरियम, सुरक्षा प्रणाली अधूरी

अभिभावकों की शिकायतें बढ़ीं, पारदर्शिता पर सवाल

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