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कागजों में रेंग रहे कायदे...वेतन अटक रहा और पेंशन हो रही लेट

 

कॉलेजों में विसंगति से परेशान प्राध्यापक, अधिकारियों को लिखा पत्र 

जबलपुर। सरकार ने प्राध्यापकों के वेतन और पेंशन के लिए नियम तो बहुत बढ़िया बना रखे हैं,लेकिन उनका पालन उतने ही बुरे ढंग से हो रहा है। प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ ने उच्च शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संघ ने अपर मुख्य सचिव और आयुक्त उच्च शिक्षा को पत्र भेजकर प्राचार्य पद पर प्रभार देने, वेतन व्यवस्था में सुधार की ओर ध्यान दिलाया।

-वर्तमान व्यवस्था में हो बदलाव

संघ के संभागीय अध्यक्ष डॉ.अरुण शुक्ला ने  बताया कि शासन के आदेशों के बावजूद प्राचार्य पद का प्रभार सही तरीके से नहीं दिया जा रहा है,वर्तमान में यह सीधे आयुक्त कार्यालय या शासन स्तर से हो रहा है। इससे प्राचार्यों को वित्तीय अधिकार मिलने में विलंब हो रहा है कागजों में नियम है, लेकिन जमीनी स्तर पर पालन नहीं होने से वेतन और पेंशन के मामले अटक रहे हैं।

-प्राचार्य को अधिकार देने की मांग

प्राध्यापक संघ ने कहा कि यदि किसी महाविद्यालय में प्राचार्य पद रिक्त हो तो वहां के वेतन भुगतान और प्रशासनिक अधिकार संबंधित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को दिए जाएं। जहां प्राचार्य पद भरा हुआ है, वहां यह अधिकार प्राचार्य के पास हों। इससे कॉलेजों का संचालन सुचारू रहेगा और वेतन आहरण जैसी बुनियादी कार्यवाही में अनावश्यक देरी नहीं होगी।

-पेंशन के प्रकरण भी लापरवाही के शिकार

पेंशन के लिए भी परेशान हो रहे प्राध्यापक संघ ने एक अन्य पत्र में यह मुद्दा भी उठाया है कि सरकारी कॉलेजों में सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वत्व भुगतान में भी लापरवाही बरती जा रही है। पेंशन नियम 1976 के अनुसार सेवानिवृत्ति से 24 माह पूर्व से पेंशन प्रकरण तैयार किया जाना चाहिए। सेवानिवृत्ति के 12 माह पूर्व तक इसे महालेखाकार कार्यालय को भेजा जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद कॉलेजों के प्राचार्य समयसीमा का पालन नहीं कर रहे हैं।


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