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क्रिप्टो बाजार में सुनामी, निवेशकों के 1.7 लाख करोड़ रुपए स्वाहा

 
नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार सुबह अपने एक ऐलान से वैश्विक बाजार में भूचाल ला दिया है। अपने पुराने प्रतिद्वंदी चीन के खिलाफ ‘ट्रेड वॉर’ को एक नए स्तर पर ले जाते हुए ट्रंप ने चीनी सामानों पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जिसके बाद अमेरिकी बाजार से लेकर क्रिप्टो मार्केट तक में हाहाकार मच गया। बिटकॉइन समेत तमाम बड़ी क्रिप्टोकरेंसी धड़ाम हो गईं और निवेशकों को एक ही दिन में 1.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी नुकसान हुआ।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर घोषणा करते हुए कहा, “1 नवंबर, 2025 से अमेरिका, चीन पर मौजूदा टैरिफ के अलावा 100% का अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा।” इसके साथ ही सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण भी लागू किया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि यह कदम चीन की उस योजना के जवाब में जरूरी है, जिसमें वह लगभग हर उत्पाद पर व्यापक निर्यात नियंत्रण लागू करने की तैयारी कर रहा है। वर्तमान में अमेरिका चीनी उत्पादों पर 30% टैरिफ लगाता है, जो अब बढ़कर कुल 130% हो जाएगा।

ट्रंप के इस ऐलान का सबसे विनाशकारी असर क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर देखने को मिला, जहाँ निवेशकों में डर का माहौल बनने से चौतरफा बिकवाली शुरू हो गई। सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) 10% से ज्यादा लुढ़ककर $1,10,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे आ गई, हालांकि बाद में इसमें मामूली सुधार होकर यह $1,13,096 पर कारोबार कर रही थी। इसी तरह, दूसरी सबसे बड़ी करेंसी इथेरियम (Ethereum) में 11.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह $3,878 पर आ गई। बाजार में गिरावट का यह दौर यहीं नहीं रुका; बीएनबी (BNB), सोलाना (Solana) और एक्सआरपी (XRP) जैसी अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में भी 14% से 18% तक की तगड़ी गिरावट देखी गई, जिससे पूरे क्रिप्टो जगत में हड़कंप मच गया।

दरअसल, यह पूरा विवाद चीन की उस धमकी के बाद शुरू हुआ है जिसमें उसने भविष्य में ‘रेयर अर्थ’ खनिजों का निर्यात रोकने की बात कही है। ये खनिज अमेरिकी टेक और ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी धमकी के पलटवार के तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बड़ा ऐलान किया है। इस ट्रेड वॉर के बढ़ने से निवेशकों को डर है कि इसका सीधा असर क्रिप्टो माइनिंग और इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी पर पड़ेगा, क्योंकि माइनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले हार्डवेयर और चिप की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। इसी डर के कारण क्रिप्टो बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।

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