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पीडीएस रैंकिंग : 51 वें नंबर पर फिसला जबलपुर,कलेक्टर हुए सख्त तब जागा अमला


राशन वितरण में जिले की स्थिति को सुधारने अवकाश में भी हो रहा काम, वितरण के साथ खाद्यान्न उठाव में भी तस्वीर संतोषजनक नहीं

जबलपुर। गरीबों को राशन उपलब्ध कराने में जबलपुर की स्थिति दिन-ब-दिन बुरी तरह से पिछड़ती जा रही है। पूरे प्रदेश के कुल 55 जिलों मंे जबलपुर का नंबर 51 पहुंच गया है। हालाकि नए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के सख्त रवैये के बाद खाद्य विभाग का अमला काम पर लग गया है,लेकिन हालात इतनी जल्दी सुधर जाएंगे,मुम्किन नहीं दिखता। कलेक्टर के निर्देश पर अवकाश के दिनों में भी काम किया जा रहा है । सितंबर की इस रैंकिंग के जारी होने के बाद जिला प्रशासन ने इस दिशा में कदम उठाए हैं । सबसे पहले तो अफसरों से सवाल ये पूछा जाना चाहिए कि आखिर ये हालात हुए कैसे और समय रहते इसके लिए प्रयास क्यों नहीं किए। नवागत कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने पहली ही बैठक में कड़ा रुख अपना लिया था।

-ऐसे हैं आंकड़े

पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम  यानी पीडीएस की  सितंबर माह की समीक्षा में खुलासा हुआ है कि जिले में खाद्यान्न का उठाव मात्र 83 प्रतिशत और वितरण केवल 51 प्रतिशत तक ही हुआ है। यही कारण है कि प्रदेश की रैंकिंग में जिले की स्थिति 51वें स्थान पर दर्ज हुई है। अब 30 सितंबर तक शत प्रतिशत उठाव और वितरण के निर्देश दिए गए हैं,लेकिन जमीनी तौर पर ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा  है। हालाकि, ऐसा नहीं है कि  ये रैंकिंग अचानक से गिर गयी हो। इससे पहले करीब नौ महीने से जबलपुर की रैंकिंग 50 तक पहुंच गयी थी और इसके बाद गिरावट नहीं रोकी जा सकी।

-क्या-क्या कोशिशें की जा रहीं

सभी प्रदाय केन्द्रों की गोदामों शनिवार व रविवार और अन्य अवकाश वाले दिनों में भी खोला जा रहा है।  परिवहनकर्ताओं को भी मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के अंतर्गत सप्ताह के सातों दिन खाद्यान्न उठाव और परिवहन करने का दायित्व सौंपा गया है। सहायक और कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों को लगाया गया है कि जिले की कोई भी उचित मूल्य दुकान बंद न रहे और हर हितग्राही तक खाद्यान्न पहुंचे। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि निर्देशों का कड़ाई से पालन नहीं करने पर जिम्मेदार अधिकारियों.कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। अफसरों से कहा गया है कि वे नमक और शक्कर की राशि समय पर जमा कराएं तथा उचित मूल्य की सभी दुकानें नियमानुसार खुली रहें। उचित मूल्य दुकानों के संचालकों की भी अपनी समस्याएं हैंएजिनका निराकरण किए बिना रैंकिंग को अपग्रेड करना मुश्किल ही होगा। 


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