बताया गया है कि कोलगवां के कृपालपुर में रहने वाली लड़की उम्र 15 वर्ष घर से बाजार जाने के लिए निकली। इस दौरान छोटी बहन भी साथ जाने के लिए पीछे-पीछे आ गई। बड़ी ने वापस घर जाने के लिए कहा लेकिन वह नहीं मानी और साथ में जाने की जिद करने लगी। रास्ते में बड़ी बहन ने गुस्से में आकर छोटी बहन की गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद झाडिय़ों में फेंककर शहर चली गई। करीब तीन घंटे बाद बड़ी बहन लौटकर आई और छोटी बहन को राहगीर की मदद से आटो में बिठाकर घर लेकर पहुंची। परिजनों ने देखा तो कहा कि छोटी बहन बेहोश हो गई थी, इसलिए घर लेकर आ गए। तत्काल बच्ची को अस्पताल पहुंचाया गया। जहां पर डाक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच की तो मौत के कारणों का पता चल गया था, इसके बाद भी पुलिस अनजान बनी जांच करती रही। यहां तक कि पुलिस ने पूछताछ की तो नाबालिग ने बताया कि मैं पैदल मेन रोड तक आई। छोटी बहन भी पीछे आ गई। मैंने उसे घर जाने के लिए कहा और मैं ऑटो में बैठकर शहर चली गई। जब बाजार से लौटी तो बस स्टैंड के पास सड़क पर महक की चप्पल नजर आई। परेशान होकर उसे आसपास ढूंढने लगी। सड़क किनारे लगी झाडिय़ों में महक बेहोशी की हालत में पड़ी मिली। मैं उसे उठाकर घर ले आई। घटनास्थल के पास ही पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी खंगाले गए। फुटेज के आधार पर नाबालिग जब बाजार से लौटी तो सड़क के दाएं तरफ उतरी थी। ऐसे में उसे सड़क के बाएं तरफ महक की चप्पल कैसे दिख गई। पुलिस ने नाबालिगा की काउंसलिंग शुरू की, कई दौर की बातचीत के बाद उसने सच्चाई बता दी। नाबालिगा ने ये भी बताया कि वह छोटी बहन की जिद करने की आदत से परेशान थी। वह छोटी-छोटी बात मां को बता देती थी। वह उसे अपने साथ कहीं भी ले जाना पसंद नहीं करती थी।
11 भाई-बहनों में 7वें नंबर की थी मृतक
मजदूरी करने वाले संजय गोंड की कुल 11 संतान हैं। इनमें 7 बेटी और 4 बेटे हैं। मृतक 7वें नंबर की थी। जबकि उसकी हत्या की आरोपी 5वें नंबर की बेटी है।
इधर परिजनों का कहना है कि घर में काफी पूछने पर वह यही बोलती रही कि बाजार न ले जाने को लेकर झगड़ा हुआ था। यह सब कैसे हो गयाए पता नहीं।