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8 साल में सबसे कम हुई रिटेल महंगाई, आम लोगों को मिली बड़ी राहत

नई दिल्ली. आम लोगों को महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी के कारण जुलाई में भारत की खुदरा महंगाई घटकर 1.55 फीसदी पर आ गई है, जो कि आठ साल का सबसे निचला स्तर है. पिछले छह वर्षों में यह पहली बार है जब महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के 2 फीसदी से 6 फीसदी के सहनशीलता बैंड से नीचे आई है. यह जून 2017 के बाद साल-दर-साल सबसे कम महंगाई दर है. 

मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में खुदरा महंगाई भी अप्रैल के 3.16 फीसदी और जुलाई 2024 में 3.54 फीसदी से कम हुई है. रॉयटर्स के 50 अर्थशास्त्रियों के एक सर्वे में जुलाई में रिटेल महंगाई के घटकर 1.76 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था. खाद्य महंगाई, खुदरा महंगाई में लगभग आधी हिस्सेदारी रखती है, पिछले महीने 1.06 फीसदी की गिरावट के मुकाबले -1.76 फीसदी रही. असमान मानसून के बावजूद, अच्छी वसंत फसल ने भारत को खाद्य कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद की है, जिससे देश में एक दशक से भी ज़्यादा समय में महंगाई में कमी का सबसे लंबा दौर जारी है.

यह आंकड़े आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) द्वारा दरों को 5.50 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने और महंगाई के पूर्वानुमान को अधिक अनुकूल बताने के लगभग एक हफ़्ते बाद आए हैं. यह ठहराव फरवरी से अब तक लगातार तीन बार दरों में कटौती के बाद आया है. इस दौरान आरबीआई ने रेपो दरों में 1 फीसदी की कटौती की है. समिति ने अपने अपने स्टांस को अभी तक न्यूट्रल रखा हुआ है. फ्यूल और पॉवर की कीमतें जून में 2.55 फीसदी से बढ़कर जुलाई में 2.67 फीसदी हो गईं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया गया है. जिसमें 25 फीसदी टैरिफ लागू हो गया है, जबकि 25 फीसदी टैरिफ अगस्त के अंतिम हफ्ते में लगाया जाएगा. ऐसे में आरबीआई का ब्याज दरों में कोई बदलाव ना करने का फैसला इकोनॉमी को बूस्ट करेगा.

आरबीआई का ये था महंगाई अनुमान

केंद्रीय बैंक की एमपीसी ने पिछले सप्ताह कहा था कि वित्त वर्ष 26 की अंतिम तिमाही में महंगाई बढऩे का अनुमान है, क्योंकि खाद्य पदार्थों, विशेषकर सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. आरबीआई ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कम हुई हैं, लेकिन आने वाले शुल्कों से प्रभावित वैश्विक व्यापार पर दबाव बना हुआ है.

पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए, आरबीआई ने कोर इंफ्लेशन 3.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जो जून में किए गए 3.70 फीसदी के पूर्वानुमान से कम है. हालांकि, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 4.9 फीसदी रहने की उम्मीद है, जो आरबीआई के 4 फीसदी के लक्ष्य को पार कर जाएगा. अगर बात तिमाही-वार अनुमान की करें तो दूसरी तिमाही में 2.1 फीसदी, तीसरी तिमाही में 3.1 फीसदी और चौथी तिमाही में 4.4 फीसदी महंगाई रहने का अनुमान लगाया गया है. आरबीआई एमपीसी ने यह भी कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति 4 फीसदी पर स्थिर बनी हुई है.

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