मुस्कुराते हुए परिजनों से मिले, कसम खाई... अब इस चाहरदीवारी के पीछे नहीं जाएंगे
जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय कारागार में शुक्रवार को 12 बंदियों को रिहा किया गया है। 15 अगस्त के मौके पर इन बंदियों को सजामाफी मिली थी। बंदियों ने जेल से बाहर आकर कसम खाई कि अब वे ऐसा काम नहीं करेंगे ताकि दोबारा इस चाहरदीवारी के पीछे आना पड़े।
जेल उप अधीक्षक मदन कमलेश ने बताया कि इन बंदियों को शासन के नियमानुसार 14 वर्ष की सजा पूरी होने पर बेहतर चालचलन और आचरण की वजह से सजामाफी दी जाती है। रिहा किए गए सभी बंदी आजीवन कारावास के थे। इन बंदियों में डिंडौरी के केवल बैगा, जनकर पुसाम, शिवचरण गौंड़, रंगीलाल गौड़, नरसिंहपुर के गुरूदयाल कोरी उर्फ गुड्डा, सिवनी के अशफाक खान, महिला बंदी हर्षलता उर्फ मुस्कान, कटनी के महेन्द्र सिंह, रमेश तिवारी उर्फ भैयाजी, वीरेन्द्र तिवारी उर्फ खोख्खल, छिंदवाड़ा के ज्ञानी चंद्रवंशी, बालाघाट के अरविंद महार उर्फ कालू शामिल हैं।
अब पांच बार रिहा होंगे बंदी
जेलर का कहना है कि अभी तक साल में तीन बार ही बंदी रिहा होत थे लेकिन अब सरकार ने इसके दिन बढ़ा दिए हैं। अब सजामाफी वाले बंदी साल में पांच दिन रिहा हो सकेंगे।