बताया जाता है कि पंकज मारु की 26 साल की बेटी सोनू मानसिक रूप से दिव्यांग है। उन्होंने अपनी बेटी के लिए रेलवे से रियायती पास बनवाया था। उस पर मानसिक विकृति शब्द लिखा देख उन्हें लगा कि ये दिव्यांगों का अपमान है। मारु ने इसके खिलाफ पिछले साल दिल्ली स्थित मुख्य दिव्यांगजन आयुक्त के कोर्ट में याचिका लगाई थी। डॉ पंकज मारु ने खुद इस मामले की पैरवी की। एक साल तक चली लड़ाई के बाद कोर्ट ने 14 जुलाई को रेलवे को शब्दावली बदलने के आदेश दिए। रेलवे ने आदेश से पहले मई में ही इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। पहले पंकज मारु ने इस शब्द को बदलवाने के लिए पश्चिम रेलवे, रेलवे बोर्ड व संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। कई बार रेलवे के चेयरमैन व डीआरएम को पत्र लिखे। अधिकारियों की तरफ से मुझे कोई जवाब नहीं मिला। याचिका दायर होने के तीन दिन बाद यानी 15 जुलाई 2024 को कोर्ट ने रेलवे को एक नोटिस जारी किया और पूछा कि क्या इस शब्द को बदला जा सकता है। 4 सितंबर 2024 को रेलवे ने इस नोटिस का जवाब देते हुए लिखा कि इस शब्द को नहीं बदला जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने मारु से पूछा कि वे अब क्या करना चाहते हैं, तो मारु ने 25 सितंबर को दोबारा सुनवाई के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई। जब इस मामले की सुनवाई हुई तो डॉ मारु ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम की धारा 92 में यह प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थल पर किसी दिव्यांगजन का जानबूझकर अपमान करता है या उसे नीचा दिखाने के इरादे से डराता-धमकाता है, तो वह अत्याचार के अपराध का दोषी माना जाएगा और उसे दंडित किया जाएगा। कोर्ट ने 28 फरवरी 2025 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। 17 जुलाई को कोर्ट ने रेलवे को निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे शब्द न केवल असंवेदनशील हैं, बल्कि ये दिव्यांगजनों की गरिमा के साथ खिलवाड़ है। रेलवे एक महीने के अंदर एक कमेटी बनाकर इस शब्द को बदले। साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि रेलवे को भविष्य में सभी रियायती पास या प्रमाण पत्रों में उचित और गरिमापूर्ण भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। रेलवे को आखिरकार इस मामले में अपना रवैया बदलना पड़ा। 9 मई को रेलवे की तरफ से एक सर्कुलर जारी किया गया। इसमें रेलवे ने लिखा कि अब रियायती पास या प्रमाण पत्रों पर मानसिक रूप से कमजोर की जगह बौद्धिक अक्षमता यानी INTELLECTUAL DISABILITY शब्द का इस्तेमाल होगा। रेलवे ने ये बताया कि 1 जून 2025 से ये प्रभावी होगा। इसके लिए एक नया प्रोफॉर्मा भी जारी किया गया।
उज्जैन। अब रेल टिकट पर मानसिक विकृत नहीं बल्कि बौद्धिक दिव्यांग लिखा होगा। यह फैसला भारतीय रेलवे ने लिया है। रेलवे ने इस फैसले को अमल में लाना शुरू कर दिया है। इसका फायदा देश के सात करोड़ दिव्यांगों को मिलेगा। ये संभव हुआ है उज्जैन के रहने वाले पंकज मारु की कारण।
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