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जागो ग्राहक जागो : कूलर हुआ खराब, दुकानदार ने नहीं किया रिपेयर, उपभोक्ता ने ऐसे सिखाया कंपनी को सबक

 सागर. एमपी के  सागर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, यहां के रहने वाले मोहम्मद शरीफ ने अपनी बेटी की शादी में दहेज देने के लिए कूलर, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन खरीदी थी. बेटी के दहेज का सामान जब उसके ससुराल पहुंचा तो कूलर नहीं चला. 

इसके साथ ही उसकी मोटर भी जल गई. 5 साल की गारंटी थी तो दुकानदार ने इसे सुधारने को कहा लेकिन दुकादार ने कहा कि इसमें वो कुछ नहीं कर सकता है. इसमें कंपनी ही कुछ कर सकती है. यह कहते हुए दुकानदार ने पीडि़त को वापस कर दिया, जिसके बाद उसने उपभोक्ता फोर में केस दर्ज करा दिया. चार साल चले केस के बाद फैसला आया, जिसमें पीडि़त को राहत मिली.


जानकारी के मुताबिक, सागर के मोहम्मद शरीफ कटरा बाजार में रहते हैं. अक्टूबर 2022 में उनकी बेटी की शादी थी तो उन्होंने एबी सेल्स से एक कूलर लिया था. जिस पर पांच साल की गारंटी थी. शादी ठंड के मौसम में हुई थी, इसलिए कूलर का उपयोग नहीं हुआ. गर्मियों का मौसम आने पर कूलर चलाया गया तो उसमें अचानक आग लग गई. वकील पवन नन्होरिया ने बताया कि मेरे पक्षकार ने ये सारी जानकारी एबी सेल्स को दी. उन्होंने जवाब दिया कि आप बिटिया के ससुराल से कूलर अपने यहां मंगवा लें, हमारा मेकेनिक उसे देख लेगा.

यह है पूरा मामला

शरीफ का कहना था कि एबी सेल्स ने कूलर के सागर आने के बावजूद उसकी रिपेयरिंग या री-प्लेसमेंट के संबंध में कोई एक्शन नहीं लिया. जब उससे इस बारे में कहा गया तो उसने जवाब दिया कि हम लोग कूलर नहीं बनाते. ये काम तो कंपनी करती है. इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं आपको जो करना है कर लो. इसके बाद पीडि़त ने परिवाद आयोग के समक्ष दायर किया. जिसमें एबी सेल्स के अलावा एक दूसरा पक्षकार कूलर निर्माता फर्म समर कूल होम एप्लाइंसेज लिमिटेड गाजियाबाद यूपी को भी बनाया गया.

पीडि़त के पक्ष में हुआ फैसला

वहीं शिकायत के बाद आयोग की कमेटी ने इस मामले में सभी पक्षों को सुना. जिसके बाद उन्होंने एबी सेल्स को इस मामले में निर्दोष मानते हुए कूलर निर्माता फर्म समर कूल होम एप्लाइंसेज को आदेश दिया कि वह एक महीने के भीतर उक्त कूलर वापस लेकर परिवादी को रसीद दें. इसके अलावा वह दो महीने के भीतर कूलर की कीमत जो 8700 रु. है, उसे परिवादी को वापस करें. परिवादी को सेवा में कमी, मानसिक व शारीरिक क्षति के लिए 3 हजार रु. और वाद व्यय के रूप में 2 हजार रु. देने का फैसला सुनाया.

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