जबलपुर। दीपावली पर्व पर 7 और 8 नवंबर को मध्यप्रदेश की 6 बिजली कंपनियों के लगभग 45 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों ने सामूहिक कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के गोविंदपुरा स्थित निष्ठा परिसर में 34 सूत्रीय मांगों को लेकर संपन्न महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह निर्णय सामने आया। इस आंदोलन की सीधी आंच जबलपुर जिले समेत पूरे संभाग पर पड़ने से बिजली महकमे के अफसर भारी असमंजस में हैं। कर्मियों का सीधा आरोप है कि बीते 20 वर्षों से त्योहारों पर निरंतर सेवा देने के बावजूद करीब 90 प्रतिशत कामगार श्रम नियमानुसार अतिरिक्त पारिश्रमिक से पूरी तरह वंचित रहे हैं। जबलपुर सहित समूचे राज्य में विद्युत आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।
पंजाब मॉडल लागू कर ठेका प्रथा खत्म करने की मांग
कर्मचारियों ने पंजाब राज्य की तर्ज पर आउटसोर्स विधेयक पारित कर ठेका व्यवस्था समाप्त करने, सीधे बिजली कंपनियों से भुगतान करने और योग्यता व वरिष्ठता अनुसार रिक्त पदों पर नियमितिकरण की मांग उठाई। न्यूनतम वेतनमान में बढ़ोतरी, जोखिम भत्ता, रात्रि कालीन भत्ता, चिकित्सा अवकाश, बोनस में समानता और अर्जित अवकाश का नकद भुगतान करने का आग्रह किया गया।
मुआवजा दस लाख करने और बायोमेट्रिक व्यवस्था की दरकार
संगठन ने करंट दुर्घटना में मौत पर आश्रितों की सहायता राशि 4 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने तथा तकनीकी कर्मियों को 20 लाख का बीमा कवर देने का प्रस्ताव रखा। साथ ही प्रतिमाह वेतन पर्ची वितरण, आधिकारिक सेवा पुस्तिका का संधारण और पारदर्शी ई-हाजिरी हेतु बायोमेट्रिक मशीनें लगाने की आवश्यकता जताई।
