जबलपुर। पश्चिम मध्य रेल के भोपाल और कोटा स्थित कारखानों में चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम सात माह में कुल 4,789 कोचों एवं वैगनों की पीरियोडिक ओवरहॉलिंग (पीओएच) की गई है। इनमें भोपाल स्थित कोच रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप (सीआरडब्ल्यूएस) में 696 कोचों और कोटा स्थित वैगन रिपेयर शॉप (डब्ल्यूआरएस) में 4,093 वैगनों का अनुरक्षण किया गया।
अक्टूबर माह में दोनों कारखानों ने कुल 688 कोचों एवं वैगनों का पीओएच किया। इसमें भोपाल कारखाने में 108 कोचों और कोटा कारखाने में 580 वैगनों का अनुरक्षण शामिल है।
महाप्रबंधक के मार्गदर्शन और मुख्य कारखाना प्रबंधकों के निर्देशन में यह कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार किए जा रहे हैं। पीओएच के दौरान कोचों और वैगनों की बॉडी व अंडरगियर की मरम्मत, ट्रॉली और बोगी के प्रमुख पुर्जों का अनुरक्षण, एयर ब्रेक सिस्टम, बफर तथा अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच और मरम्मत की जाती है। इसके अलावा पहियों और धुरियों (व्हील एवं एक्सल) का विस्तृत निरीक्षण भी किया जाता है।
सुरक्षा और समयपालन में मिलेगी मदद
नियमित पीओएच से कोचों एवं वैगनों की तकनीकी स्थिति और विश्वसनीयता बेहतर होती है। इससे परिचालन के दौरान तकनीकी खराबियों की आशंका कम करने और ट्रेनों के सुरक्षित व सुचारु संचालन में मदद मिलती है। इसका सीधा लाभ यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर के रूप में मिलता है।
वहीं, वैगनों के बेहतर अनुरक्षण से उनकी उपलब्धता बढ़ती है, जिससे माल परिवहन क्षमता को मजबूती मिलती है। इससे उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को माल की समय पर ढुलाई में मदद मिलती है।
पश्चिम मध्य रेल के कारखानों में आधुनिक तकनीक, उन्नत मशीनरी और बेहतर अनुरक्षण प्रणालियों के जरिए कोचों एवं वैगनों की गुणवत्ता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इनसे रेल परिचालन को अधिक विश्वसनीय और समयबद्ध बनाने के साथ माल परिवहन व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
