पुलिस के अनुसार गढ़ाकोटा निवासी प्रबलसिंह ठाकुर निवासी तिली के पिता से भोपाल से सागर आते समय बस में हुई थी। शिवम ने अपना नाम शिवम तिवारी बताया और कहा कि उसने इनकम टैक्स ऑफिसर की नौकरी छोड़कर जबलपुर के सिहोरा में नायब तहसीलदार की नौकरी जॉइन की है। इसके बाद उसने शासकीय काम के लिए गाड़ी की जरूरत बताकर फरियादी को झांसे में लिया। आरोपी की बातों में आकर फरियादी ने 17 अगस्त 2026 को नई बोलेरो खरीदी और पांच साल के लिए हर महीने 1.05 लाख रुपए देने के फर्जी एग्रीमेंट पर आरोपी को सौंप दिया गया। शिवम बोलेरो पर हूटर और नायब तहसीलदार की नेमप्लेट लगाकर घूमने लगा। बाद में फरियादी को उसके बयानों पर संदेह हुआ तो 4 सितंबर को उसने आरोपी से वरिष्ठ अधिकारियों से बात कराने और मूल दस्तावेज दिखाने को कहा। शिवम अपने साथी अमित के साथ पहुंचा, जिससे सख्ती से पूछताछ करते हुए दस्तावेज मांगे गए तो फर्जी आई-कार्ड सामने आ गया। इसके बाद आरोपी फोन पर बात करने का बहाना बनाते हुए बुलेरो छोड़कर भाग गया। इस मामले की शिकायत मिलने पर सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अब आरोपी शिवम के फरार साथी अमित की तलाश में जुटी है। जिसके पकड़े जाने पर और भी खुलासे हो सकते है।
पहले भी ठगी के मामले में पकड़ा जा चुका है आरोपी-
पुलिस के अनुसार, आरोपी शिवम पहले भी इसी तरह की वारदातों में पकड़ा जा चुका है। करीब एक साल पहले ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने सागर के चार युवकों के एक गिरोह को पकड़ा था। गिरोह हाईवे पर खुद को पुलिसकर्मी बताकर अवैध वसूली करता था और बेरोजगार युवाओं को पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देकर ठगी करता था। उस गिरोह का सरगना भी गढ़ाकोटा का शिवम चतुर्वेदी ही था। जेल से बाहर आने के बाद उसने ठगी के लिए नया तरीका अपनाया।