महाकोशल कॉलेज में सजी किताबों की अनूठी प्रदर्शनी
जबलपुर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल स्वशासी अग्रणी महाविद्यालय में हिंदी पखवाड़ा समारोह के उपलक्ष्य में केंद्रीय ग्रंथालय के तत्वावधान में आज पुस्तक प्रदर्शनी लगाई गई। इस आयोजन का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. अरुण शुक्ल तथा प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ संपन्न किया। प्रो. विभा निगम के कुशल मार्गदर्शन तथा ग्रंथपाल श्रीमती संघप्रिया तिवारी के संयोजन में हुए इस गरिमामय समारोह में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. तृप्ति उकास, राजनीति विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि टंडन, डॉ. महेंद्र कुशवाहा, डॉ. बुशरा खान, श्रीमती ललिता लोधी एवं डॉ. इरफान उस्मानी सहित समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी और सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
ज्ञान संवर्धन हेतु निरंतर उत्कृष्ट पठन बेहद जरूरी
उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने मानव जीवन और बौद्धिक विकास में ग्रंथों के महत्व को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य में कहा कि हमारी भाषाई और साहित्यिक विरासत अत्यंत गौरवशाली है, जिसे आत्मसात करके ही छात्र अपने व्यक्तित्व को निखार सकते हैं। उन्होंने युवाओं को सतही सामग्री के स्थान पर गंभीर और उच्चकोटि की कृतियों के नियमित वाचन का संकल्प लेने को कहा। प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों से कहा कि महाविद्यालय की लाइब्रेरी असीम ज्ञान का भंडार है। उन्होंने सभी नवप्रवेशी और नियमित अध्येताओं को लाइब्रेरी कार्ड बनवाकर वहां उपलब्ध संसाधनों का भरपूर लाभ उठाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि निरंतर अध्ययन की आदत ही प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का आधार बनती है। इसी मंच पर ग्रंथालय विभाग की ओर से सामान्य ज्ञान एवं भाषा विषय पर पूर्व में आयोजित कराई गई विशेष प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के मेधावी छात्र-छात्राओं को मंच से पुरस्कृत भी किया गया। प्रदर्शनी स्थल पर मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, रामधारी सिंह दिनकर, महादेवी वर्मा और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के संपूर्ण रचना संसार को क्रमबद्ध ढंग से सजाया गया था। इसके अतिरिक्त कला, संस्कृति, व्याकरण, पारिभाषिक शब्दावली, शब्दकोश, राजभाषा नियमों से संबंधित हैंडबुक एवं उपयोगी संदर्भ ग्रंथ भी प्रदर्शित किए गए। छात्र-छात्राओं ने विभिन्न विधाओं की किताबों के पन्ने पलटकर उनके विषय, प्रकाशक और सामग्री को गहराई से समझा। शिक्षकों ने भी अपनी विषयगत रुचि के अनुसार पुस्तकों का चयन कर विद्यार्थियों को उनके महत्व से अवगत कराया। पूरा परिसर दिनभर ज्ञान चर्चा और पठन-पाठन की सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
