जबलपुर। जबलपुर के सरकारी अनाज भंडारण में 1000 टन गेहूं गायब होने का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। अन्नपूर्णा और मां नर्मदा वेयरहाउस में स्टॉक की औचक जांच के दौरान अनाज में भारी कमी पाई गई। इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए वेयरहाउस संचालकों ने दूसरे गोदामों के रिकॉर्ड में हेराफेरी करते हुए कागजी खेल खेला। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और जांच के कड़े निर्देश जारी किए हैं। भोपाल से वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम जबलपुर पहुंच रही है, जो स्टॉक रजिस्टर, परिवहन चालान और ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों का मिलान करेगी। इस मामले में दोषी वेयरहाउस संचालकों के साथ-साथ मिलीभगत करने वाले जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
जांच में सामने आई कागजी आंकड़ों की हेराफेरी
प्रारंभिक पड़ताल से यह स्पष्ट हो गया है कि स्टॉक के मिलान के बजाय उसे मैनेज करने का प्रयास किया गया था। जिला स्तर पर उपार्जन समिति से जुड़े अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की जांच की जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अब पुराने सभी लंबित मामलों की फाइलें भी फिर से खोली जाएंगी ताकि सिस्टम की कार्यप्रणाली में सुधार हो सके। जिला प्रशासन के लिए यह बड़ा चुनौतीपूर्ण मामला बन गया है क्योंकि पूर्व में श्रीजी वेयरहाउस से 1400 टन धान गायब होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। अब भोपाल से आने वाली टीम का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अनाज कहां गया और इसमें किसकी संलिप्तता है।
भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की ठोस रणनीति
जबलपुर में बार-बार अनाज गायब होने की घटनाओं से सरकारी निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। वेयरहाउसिंग और पारदर्शिता के दावों के बीच इस नए घोटाले ने आम जनता का भरोसा हिला दिया है। अब सरकारी मशीनरी हर छोटे-बड़े रिकॉर्ड को बारीकी से खंगालने की योजना बना रही है ताकि दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने निर्देश दिए हैं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। अब हर किसी की निगाहें भोपाल से आने वाली उस रिपोर्ट पर टिकी हैं जो इस पूरे भ्रष्टाचार का कच्चा-चिट्ठा खोलेगी।
