दमोह. एमपी के दमोह जिला जेल से सामने आई एक घटना ने जेल प्रशासन को अलर्ट कर दिया है। बैरक के अंदर दो कैदियों के बीच हुए विवाद के दौरान एक कैदी को दूसरे कैदी का नाखून लग गया, जिससे उसे चोट आई और खून भी निकला।
बाद में पता चला कि नाखून लगाने वाला कैदी एचआईवी पॉजिटिव है। इसके बाद प्रशासन ने बिना देरी किए घायल कैदी को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा, जहां से उसे आगे की जांच और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज सागर रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों ने बरती अतिरिक्त सावधानी
जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार किसी भी ऐसे मामले में जहां खून के संपर्क की संभावना हो मरीज का मेडिकल मूल्यांकन जरूरी होता है। यही वजह है कि घायल कैदी को तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास भेजा गया। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल किसी एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति का नाखून लग जाने से संक्रमण होना तय नहीं माना जाता। संक्रमण का खतरा कई मेडिकल परिस्थितियों पर निर्भर करता है, जैसे घाव की स्थिति, खून का संपर्क और अन्य फैक्टर। ऐसे मामलों में डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच करते हैं और यदि जरूरी हो तो पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस जैसी दवाएं भी तय समय के भीतर शुरू की जा सकती हैं। इसलिए किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल जांच की रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी होता है। फिलहाल घायल कैदी की निगरानी की जा रही है और विशेषज्ञ डॉक्टर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय करेंगे।
जेल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
स घटना के बाद दमोह जिला जेल की सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है। जेल उप अधीक्षक एम.एल. पटेल ने पुष्टि की कि बैरक के अंदर दोनों कैदियों के बीच झूमाझटकी हुई थी, जिसमें एक कैदी घायल हुआ। चूंकि दूसरा कैदी पहले से एचआईवी पॉजिटिव है, इसलिए घायल कैदी को एहतियात के तौर पर इलाज के लिए भेजा गया। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और घायल कैदी की स्वास्थ्य रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
