जबलपुर। बरगी बांध में 30 अप्रैल को बड़ा हादसा हुआ जिसमें कई लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद मध्य प्रदेश पर्यटन निगम की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। पर्यटन निगम के जल क्रीड़ा सलाहकार राजेंद्र निगम ने एक अजीबोगरीब बयान दिया है। उनका कहना है कि क्रूज में बैठने के बाद लाइफ जैकेट पहनना जरूरी नहीं है। वे तर्क दे रहे हैं कि गोवा और अन्य जगहों पर भी लोग जैकेट पहनना पसंद नहीं करते। जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्ट्स और सरकारी नियमों के अनुसार नाव या क्रूज पर चढ़ते ही लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य है।
तकनीकी सुविधाओं की बड़ी नाकामी
नियमों के अनुसार किसी भी वाटर स्पोर्ट्स गतिविधि के समय बचाव दल हमेशा तैयार रहना चाहिए। बरगी बांध में ऐसी कोई टीम मौके पर मौजूद नहीं थी। गाइडलाइन कहती है कि रेस्क्यू नाव में कम से कम 10 हॉर्स पावर का इंजन होना चाहिए। इसके अलावा एक निगरानीकर्ता का होना जरूरी है। बरगी में इन नियमों का पालन नहीं किया गया और संचार व्यवस्था फेल होने के कारण समय पर मदद नहीं मिल पाई। हादसे के बाद सामने आए वीडियो में दिखा कि यात्रियों को लाइफ जैकेट तब दी गई जब क्रूज में पानी भर चुका था। कई लोगों को सही आकार की जैकेट नहीं मिली और दिल्ली की एक पर्यटक महिला व उसका बच्चा भी इसी कारण नहीं बच सके।
कर्मचारियों के पास नहीं थी तय योग्यता
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्ट्स के नियमों के मुताबिक वाटर स्पोर्ट्स सेंटर पर काम करने वाले हर कर्मचारी के पास लाइफ सेविंग सर्टिफिकेट होना चाहिए। कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार और सीपीआर की ट्रेनिंग भी जरूरी है। इन प्रमाण पत्रों की अवधि 2 साल की होती है और इन्हें समय पर रिन्यू करवाना होता है। बरगी बांध पर तैनात कर्मचारियों के पुराने हो चुके प्रमाण पत्रों को रिन्यू तक नहीं कराया गया था। नियमों के अनुसार क्रूज और बोटिंग का काम केवल दिन के समय हो सकता है, लेकिन हादसे के दिन अंधेरा होने के बाद भी क्रूज चलाया जा रहा था। शाम 6 बजकर 7 मिनट तक क्रूज में पानी भरना शुरू हो गया था, जिसे यात्रियों ने अपने परिवार वालों को फोन करके भी बताया था।
