जबलपुर। स्कूली बच्चों के बस्ते के बोझ को कम करने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। लोक शिक्षण संचालनालय और बाल संरक्षण आयोग ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि स्कूलों में नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी का कड़ाई से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। शासन का मानना है कि भारी बस्ते न केवल बच्चों के शारीरिक विकास को बाधित करते हैं बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डालते हैं। इसी क्रम में पहली कक्षा के छात्र के बैग का वजन अधिकतम 1078 ग्राम निर्धारित किया गया है।
ऐसा है स्कूल बैग वजन का गणित
लोक शिक्षण संचालनालय की अपर परियोजना संचालक नंदा भलावे ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर स्कूलों में औचक निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। शासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों के लिए स्कूल बैग की कोई आवश्यकता नहीं है। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर वजन की सीमा को ग्राम के स्तर तक तय किया गया है ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे। दूसरी कक्षा के लिए 1080 ग्राम और तीसरी कक्षा के लिए 1572 ग्राम की सीमा तय है। जैसे-जैसे कक्षाएं बढ़ती हैं, यह वजन भी क्रमिक रूप से बढ़ता जाता है।
क्या है भारी बस्तों का दुष्प्रभाव
बाल संरक्षण आयोग ने कलेक्टर को लिखे पत्र में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि कई निजी संस्थान अब भी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। आयोग के अनुसार छोटे बच्चों की रीढ़ की हड्डी और कंधों पर क्षमता से अधिक बोझ पड़ने से उन्हें भविष्य में गंभीर शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। शासन ने निजी और सरकारी दोनों प्रकार के स्कूलों को चेतावनी दी है कि यदि निरीक्षण के दौरान तय मानकों से अधिक वजन पाया गया तो संबंधित संस्थान के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
किस कक्षा के लिए कितना वजन
शासन द्वारा जारी निर्देशों के तहत हर कक्षा के लिए वजन की एक लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है। चौथी कक्षा के लिए 1804 ग्राम और पांचवीं के लिए 1916 ग्राम वजन तय है। कक्षा छठवीं में यह सीमा 3080 ग्राम, सातवीं में 3508 ग्राम और आठवीं में 3640 ग्राम रखी गई है। हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर भी इसे नियंत्रित किया गया है, जिसमें नौवीं कक्षा के लिए 4400 ग्राम और दसवीं के लिए 4182 ग्राम निर्धारित है। कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए बैग का वजन 3.5 किलो से 5 किलो के बीच होना चाहिए।
छुट्टियों के दौरान आदेश क्यों
शिक्षा विभाग के इस कदम के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं और इसी दौरान स्कूलों से वजन की रिपोर्ट मांगी गई है। जानकारों का कहना है कि जब बच्चे स्कूल ही नहीं आ रहे हैं तो उनके बैग का वास्तविक वजन मापना कठिन है। आशंका जताई जा रही है कि कई स्कूल बिना जमीनी जांच के ही कागजी रिपोर्ट जमा कर सकते हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि सत्र शुरू होते ही जांच अभियान में तेजी लाई जाएगी और बच्चों को इस भारी बोझ से मुक्ति दिलाई जाएगी।
