मुंबई. शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार 11 मई को एक बार फिर निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में गहरे धंसते हुए नजर आए, जिससे पूरे बाजार में चिंता का माहौल हो गया।
शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 1,000 अंक से भी अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए 76,300 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, निफ्टी में भी 300 अंक से ज्यादा की भारी टूट देखने को मिली है, जो इस समय 23,900 के अहम स्तर पर व्यापार कर रहा है। इस मंदी के दौर में निवेशकों की पूंजी पर सीधा असर पड़ा है और कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव साफ देखा जा सकता है।
बाजार की इस गिरावट में ऑटो, बैंकिंग और रियल्टी जैसे प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में विशेष रूप से तेज बिकवाली हावी रही। इन सेक्टरों के शेयर धड़ाम होते हुए नजर आए, जिससे इन उद्योगों से जुड़े निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस अचानक आई गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं, जिन्होंने निवेशकों के भरोसे को डगमगा दिया है।
वहीं बाजार में इस भारी बिकवाली की तीन मुख्य वजहें सामने आ रही हैं। सबसे पहले, ईरान और इजराइल के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन के बाधित होने का डर पैदा कर दिया है। इस अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करने पर मजबूर किया है, जिससे इक्विटी बाजारों में बिकवाली तेज हो गई। दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे भारत का आयात बिल और भी अधिक बढऩे की आशंका है। इसके परिणामस्वरूप देश में महंगाई बढऩे का खतरा भी मंडरा रहा है, जो हमेशा शेयर बाजार के लिए एक नकारात्मक संकेत माना जाता है। तीसरा अहम कारण एशियाई बाजारों में दिख रही गिरावट का असर है। वैश्विक बाजारों के रुझान अक्सर घरेलू बाजारों को प्रभावित करते हैं, और आज एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार देखने को मिला, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय बाजार पर पड़ा।
