इंदौर. लोक निर्माण विभाग (पीडबलूडी) में रिश्वतखोरी का आलम यह है कि बिना रिश्वत दिए ठेकेदारों के बिल का भुगतान नहीं हो पाता. ऐसे ही एक चौंकाने वाले मामले में विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (ईई), एसडीओ और सब इंजीनियर को लोकायुक्त टीम ने रंगे हाथों पकड़ा है. यह पहला मामला है जब इंदौर संभाग के तीन बड़े अधिकारियों को एक साथ लोकायुक्त टीम ने ट्रैप किया है.
निर्माण एजेंसी पटेल श्री इंटरप्राईजेस ने दर्ज कराई थी शिकायत
लोकायुक्त टीम को निर्माण एजेंसी पटेल श्री इंटरप्राईजेस धार के राजपाल सिंह पंवार ने अपनी फर्म द्वारा 2023 में मैथवाडा-फारेलेन पहुंच मार्ग का कार्य कॉन्ट्रैक्ट पर 4 करोड़ 73 लाख 35 हजार रुपये में लिया था. शिकायतकर्ता की फर्म द्वारा इस काम को 4 करोड़ 51 लाख 72 हजार 101 रुपये में पूरा किया गया. आवेदक की फर्म द्वारा किये गये कार्य के अंतिम बिल का भुगतान करने के एवज में लोक निर्माण विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर जयदेव गौतम, अनुविभागीय अधिकारी टीके जैन और सब इंजीनियर अंशु दुबे द्वारा क्रमश: डेढ़ लाख और एक-एक लाख रुपए की मांग की जा रही थी. इस स्थिति से परेशान शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के पास शिकायत की.
शिकायत सही पाये जाने पर आज 21 अप्रैल 2026 को ट्रैप दल का गठन किया गया. इसके बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपी लोक निर्माण विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर जयदेव गौतम को उनके शासकीय निवास पर आवेदक से डेढ़ लाख रुपये, अनुविभागीय अधिकारी टीके जैन को विभाग के पोर्च के नीचे से आवेदक के प्रतिनिधि से एक लाख रिश्वत राशि लेते हुये रंगे हाथों पकड़ा. इसके अलावा सब इंजीनियर अंशु दुबे ने रिश्वत की राशि कम होने के कारण आवेदक के प्रतिनिधि से नहीं ली.
इसके बाद तीनों को हिरासत में लेकर आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 एवं 61(2), बीएनएस 2023 के अंतर्गत कार्यवाही की गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि लोक निर्माण विभाग के सबसे प्रमुख अधिकारी ही इस मामले में ट्रैप हुए हैं तो पूरे विभाग में हड़कंप की स्थिति है.
लोकायुक्त की कार्यवाही के दौरान कार्यवाहक निरीक्षक आशुतोष मिठास, कार्यवाहक प्रआर विवेक मिश्रा, आशीष शुक्ला, आदित्य सिंह भदौरिया, आरक्षक विजय कुमार, आरक्षक चन्द्रमोहन बिष्ट, आरक्षक आशीष नायडू, आशीष आर्य, अनिल परमार, आरक्षक कृष्णा अहिरवार आदि शामिल रहे
