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श्रीराम कथा के तृतीय दिवस प्रभु रामलला का हुआ जन्म, अयोध्या सी अनुभूति हुई

 

जबलपुर। गौरीघाट के आर्युवेद कॉलेज मैदान में चल रही श्रीरामकथा का तृतीय दिवस आज तब इतिहास में लिख गया जब श्रीरामजी के प्राकट्य की हूबहू अयोध्या सी अनुभूति उपस्थित जनमेदिनी ने अनुभव की। मनु महाराज की कथा प्रसंग में कथा व्यास पद्म विभूषणए तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु श्रीरामभद्राचार्य जी ने बड़े भाव से अस मन होत उठाय लेऊं कुरवा.. उठाए लेऊंकरवा...लेऊं हियरवा, भजन से परमात्मा राम के बालरूप को साकार कर दिया। करवा का अर्थ गोद से था। महाराजश्री के भाव में सब ऐसे विभोर हुए कि  मानो उनकी ही गोद में श्रीरामजी ही आ गए हों। 

                                 समरसता सेवा संगठन के सौजन्य से हो रही कथा में संगठन की टीम ने पूरे पंडाल का अनोखा पुष्प.वैलून श्रृंगार किया। भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप की सजीव झांकी के दर्शन सभी ने की। रामलला का जन्म सभी ने नाच गाके उत्सव के रूप में मनाया। रामजी के जन्म के समय में आसमान से मेघ गर्जन और धरा पर मंत्र उच्चारण हो रहा था। मानस के सरस वक्ता महाराजश्री ने ष्सत्यसंध पालक श्रुति सेतू-रामजनमजग मंगल हेतू को मंच पर सजीव कर लिया। अवधपुरी में जय-जय सुरनायक-जनसुख दायक प्रणतपाल भगवंता संकीर्तन के साथ भगवान प्रकट हुए।

सविस्तार सुनाई श्रीराम जन्म की कथा-

महाराजश्री ने भगवान श्रीराम के मंगलकारी जन्म से जुड़ी सभी कथाएं पूरे मनोयोग से सुनाई । जय.विजयए नारद प्रसंग, वृंदा प्रसंग के माध्यम से उन्होंने आध्यात्म के गूढतम रहस्य प्रकट किए। उन्होंन बताया कि ष्राम भगत जग चार प्रकाराष् चौपाई यूं ही नहीं लिखी गई। राम भगतों के चार प्रकार हैं। ये हैं आर्त, जिज्ञास, अर्थाती और ज्ञानी। आर्त की कथा जय विजय कल्प में, जिज्ञासु की कथा वृंदा कल्प में, अर्थाती की कथा नारद प्रसंग में और चौथी कथा ज्ञानी की मनु के रूप में आती है।  

रामजी ज्ञान के प्रतीक नहीं ज्ञान के स्वरूप-

आज की कथा में महाराजश्री ने पदार्थवाद पर चिंतन करते हुए कहा कि प्रतीकवाद को ईश्वर के साथ जोडऩा सही नहीं है। ईश्वर प्रतीक में नहीं रहता। हम राम जी को ज्ञान का लक्ष्मण जी को वैराग्य का प्रतीक नहीं कह सकते। उन्होंने कहा कि रामजी ज्ञान के प्रतीक नहीं बल्कि ज्ञान के स्वरूप हैं। 

रामकथा सबको गानी चाहिए-

महाराजश्री ने आज की कथा का श्रीगणेश प्रथित पावन शास्त्र परंपराम-लषित लक्ष्मण जानकी वैभवाम, ललित मानस भाव मनोहराम-गिरिधरस्य गिरम सृणो नर्मदे श्लोक से किया। चिरपरिचित सीताराम जय सीताराम संकीर्तन ने कथा पंडाल का वातावरण राममय कर दिया। उन्होंने कहा कि नर्मदा माई की गोद में बैठकर हम समरसता सेवा संगठन के संयोजन में राम जनम जग मंगल हेतू चौपाई पर कथा करके बहुत अच्छा लग रहा है। 

इन्होंने किया पादुका पूजन-

शुरुआत में सुखानंद द्वाराचार्य, राघवदेवाचार्य की उपििस्थ्त में तुलसी पीठ के युवराज आचार्य रामचंद्रदासजी ने पादुका पूजन का मंगल विधान संपन्न  कराया। मंच पर उपस्थित स्वामी गिरीषानंद जी, साध्वी ज्ञानेश्वरी जी, संत रामभारती जी का अभिनंदर समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने किया। शहर के प्रथम नागरिक महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने सपत्नीक पादुका पूजन किया। प्रतिदिन की भांति आचार्य रोहित दुबे, सौरभ दुबे के मार्गदर्शन में आचार्य गणों के साथ यजमानों द्वारा विधिवत पूजन एवं सहस्त्रार्चन किया गया। इस अवसर पर  कथा यजमान प्रकाश धीरावाणी,डॉ जितेन्द्र जामदार, समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन, अखिल मिश्रा, सुरेश आसवानी, तारु खत्री, राजू हिरानी, बब्वल रजक, राजू चौरसिया, सुशील सोनी सहित अन्य उपस्थित रहे। मंच संचालन ब्रजेश दीक्षित ने किया। 

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