जबलपुर। मदन महल थाना अंतर्गत राइट टाउन क्षेत्र में एक चिकित्सक और उनके बेटे को गड़ा धन दिलाने के नाम पर पीतल थमाकर 60 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला प्रकाश में आया है। शातिर ठगों ने असली सोने का लालच देकर इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी वीरेन्द्र प्रजापति उर्फ सोनू सहित उसके अन्य साथियों के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।
आरोपी ने ऐसे की ठगी की प्लानिंग
ठगी की पटकथा लगभग 2 माह पूर्व शुरू हुई थी। राइट टाउन निवासी डॉ. एके त्रिवेदी अपनी क्लीनिक पर मरीजों का उपचार कर रहे थे, तभी वीरेन्द्र प्रजापति वहां उपचार कराने के बहाने पहुंचा। उसने उपचार के दौरान डॉक्टर से नजदीकी बढ़ाई और खुद को गरीब बताते हुए उनका विश्वास जीत लिया। वीरेन्द्र ने डॉक्टर को बताया कि उसे खुदाई में भारी मात्रा में गड़ा हुआ धन मिला है, जिसमें सोने के सिक्के और जेवरात शामिल हैं। उसने बाजार भाव से बेहद कम दाम पर यह सोना बेचने का प्रस्ताव डॉक्टर के सामने रखा।
असली सिक्के की जांच से डॉक्टर को उलझाया
सौदा पक्का करने से पहले डॉक्टर ने सोने की शुद्धता परखने की शर्त रखी। इस पर वीरेन्द्र ने उन्हें सोने का एक असली सिक्का जांच के लिए दिया। डॉक्टर ने जब स्थानीय सुनार से उस सिक्के का परीक्षण कराया तो वह पूरी तरह शुद्ध निकला। सिक्के के असली होने की पुष्टि होते ही डॉक्टर आरोपियों के जाल में फंस गए। इसके बाद वीरेन्द्र ने अपने गिरोह के अन्य सदस्यों पन्नालाल, धर्मेंद्र और रमादेवी को अपने माता-पिता और भाई के रूप में डॉक्टर से मिलवाया ताकि उन्हें एक सामान्य परिवार समझकर शक न हो।
नगदी लेकर थमा दिया पीतल
दोनों पक्षों के बीच 15 लाख रुपए प्रति किलो की दर से सोने का सौदा तय हुआ। 5 मार्च को आरोपी पन्नालाल और वीरेन्द्र एक थैला लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे जिसमें लगभग 5 किलो धातु थी। डॉक्टर ने वजन के हिसाब से उन्हें 50 लाख रुपए नगद दे दिए। शेष 25 लाख रुपए बाद में देना तय हुआ। इसी दौरान आरोपियों ने डॉक्टर के बेटे अनंत को भी झांसे में लेकर उससे 10 लाख रुपए लेकर अलग से पीतल थमा दिया। 1 अप्रैल को जब धातु की गहराई से जांच कराई गई तो वह पीतल निकली। क्राइम ब्रांच ने शिकायत के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
