जबलपुर। भारतीय रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों और उनके आश्रितों के हक में एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अक्सर रेल कर्मचारी अपने नवजात बच्चों के इलाज को लेकर परेशान रहते थे, क्योंकि बिना उम्मीद कार्ड (विशिष्ट चिकित्सा पहचान कार्ड) के रेलवे अस्पतालों में उपचार मिलने में कठिनाई आती थी। कर्मचारियों की इस समस्या की ओर डबलूसीआरईयू काफी समय से एआईआरएफ के माध्यम से रेलवे बोर्ड का ध्यान आकृष्ट कराता रहा है.
अब रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि किसी भी नवजात शिशु का इलाज केवल कार्ड न होने की वजह से नहीं रुकेगा। रेलवे की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, रेलवे मेडिकल लाभार्थियों को अस्पताल में सुविधाओं का लाभ लेने के लिए उम्मीद कार्ड दिखाना अनिवार्य होता है।
हालांकि, परिवार में नए सदस्य यानी नवजात बच्चे के जन्म के बाद उसका कार्ड बनने की प्रक्रिया में कुछ समय लग जाता है। आपातकालीन स्थिति में, जब बच्चे को तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती थी, तब कार्ड न होने की वजह से कर्मचारियों को दर-दर भटकना पड़ता था या इलाज मिलने में देरी होती थी।
रेलवे बोर्ड का य है आदेश
रेलवे यूनियन इसे लेकर लगातार सवाल उठा रही थी। कर्मचारियों की इस पीड़ा को समझते हुए रेलवे बोर्ड के स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आशुतोष गर्ग ने 27 फरवरी को सभी जोन के मुख्य चिकित्सा निदेशकों और उत्पादन इकाइयों को पत्र जारी कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि आपातकालीन स्थिति में यदि किसी नवजात के पास उम्मीद कार्ड नहीं है, तो सभी संबंधित अधिकारी और डॉक्टर एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं। कार्ड के अभाव में किसी भी बच्चे के इलाज में देरी नहीं होनी चाहिए। अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) में अब ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिससे रेलवे मेडिकल लाभार्थियों के नवजात बच्चों के लिए तत्काल कार्ड जनरेट किए जा सकें। रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिया है कि यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि आपातकाल की स्थिति में नवजात शिशुओं को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं बिना किसी बाधा के मिलें।
निर्णय का डबलूसीआरईयू ने किया स्वागत
रेलवे बोर्ड के इस फैसले का वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन (डबलूसीआरईयू) के महामंत्री का. मुकेश गालव ने स्वागत किया है। कहा कि जन्म के तुरंत बाद यदि बच्चा बीमार होता था, तो कार्ड की औपचारिकताएं पूरी करना किसी मानसिक प्रताडऩा से कम नहीं था। अब डिजिटल सिस्टम (एचएमआईएस) के अपडेट होने और बोर्ड के कड़े रुख से हजारों रेल परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। पश्चिम मध्य रेलवे के अस्पतालों सहित सभी जोन के चिकित्सालयों में यह व्यवस्था प्रभावी हो गई है।
