जबलपुर। फाल्गुन का रंग-गुलाल का त्योहार होली ने रंगों की जगह गेरू ने ले ली है। छोटे से लेकर बड़ों तक अब पीला और लाल गेरू का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे बाजारों में विक्रय किए जाने वाले रंग-गुलाल की बिक्री पर असर पड़ा है। जानकारों का कहना है कि बदलते समय में रंगों की जगह गेरू का इस्तेमाल करना लोगों को सस्ता पड़ रहा है। इसमें भी कुछ जगहों पर गेरू की जगह पीली मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
शहर में होली त्योहार पर सुबह से ही कॉलोनी, मोहल्लों में बच्चों के बीच होली की शुरूआत की गई है। इसमें दोपहर होते-होते तक बड़े-बूढ़े भी होली खेलने में शामिल होने लगे। इसमें यह देखा गया कि चुनिंदा जगहों पर लाउडस्पीकर लगाकर होली की मस्ती में डांस के साथ एक-दूसरे पर गेरू और पीली मिट्टी फेंकी जा रही थी।
अपरिचित से दूर : पहले की तरह इस बार होली में यह देखने मिला है कि परिचित व्यक्ति के साथ ही लोग होली खेल रहे हैं। अपरिचित व्यक्ति को रंग-गुलाल या गेरू नहीं लगा रहे हैं।
पुलिस मुस्तैद : सडकों, चौराहों-तिराहों पर पुलिस मुस्तैद है। इसके अलावा पुलिस गश्त भी लगा रही है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
