यह माना जा रहा है कि प्रेस में काम करने वाले कर्मचारियों की मिलीभगत से ही पेपर लीक की इस घटना को अंजाम दिया गया। जबलपुर के शिक्षा विभाग के अफसरों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मौके की स्थिति देखकर प्रथम दृष्टया लीक की संभावना है
जबलपुर। राज्य शिक्षा केंद्र की पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं में गोपनीयता की धज्जियां उड़ने का मामला सामने आया है। भोपाल स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस से 17 जिलों के प्रश्नपत्र लीक होने की खबर ने पूरे प्रदेश सहित जबलपुर के शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जांच में यह बात निकलकर आई है कि प्रिंटिंग प्रेस में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे और प्रश्नपत्र वहां असुरक्षित तरीके से खुले में रखे हुए थे। इस लापरवाही के कारण जबलपुर सहित अन्य प्रभावित जिलों के हजारों छात्र और उनके अभिभावक अब भविष्य को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती जांच में प्रिंटिंग व्यवस्था की बड़ी खामियां उजागर हुई हैं।
प्रिंटिंग प्रेस में सुरक्षा मानकों की अनदेखी
भोपाल की जिस नवीन प्रिंटिंग प्रेस को प्रश्नपत्र छापने का जिम्मा दिया गया था, वहां निरीक्षण के दौरान भारी अव्यवस्था पाई गई। अधिकारियों के अनुसार, वहां न तो सीसीटीवी कैमरों की पर्याप्त निगरानी थी और न ही आने-जाने वालों पर कोई रोक-टोक। प्रश्नपत्रों को जिस तरह खुले में इधर-उधर रखा गया था, उससे किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए उन तक पहुंचना बेहद आसान हो गया था। यह माना जा रहा है कि प्रेस में काम करने वाले कर्मचारियों की मिलीभगत से ही पेपर लीक की इस घटना को अंजाम दिया गया। जबलपुर के शिक्षा विभाग के अफसरों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मौके की स्थिति देखकर प्रथम दृष्टया लीक की संभावना है।
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
पेपर लीक होने के बाद अब उन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं जिन्हें निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था। बीआरसी स्तर के अधिकारियों के हवाले केंद्रों तक पेपर पहुंचाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम था, लेकिन इसके बावजूद पेपर लगातार लीक होते रहे और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। विशेषज्ञों का तर्क है कि अब सारी जिम्मेदारी प्रिंटिंग प्रेस पर डालकर विभाग अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता। जबलपुर के शैक्षणिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि यदि समय रहते निगरानी तंत्र मजबूत होता तो छात्रों की मेहनत पर इस तरह पानी नहीं फिरता। इस मामले की एक विस्तृत आंतरिक रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों और साइबर सेल को सौंप दी गई है।
साइबर सेल की कार्रवाई और दोबारा परीक्षा का डर
इस पूरे प्रकरण की जांच अब साइबर सेल के हाथों में है। पुलिस उन सभी कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है जहां से प्रश्नपत्रों के वितरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। साइबर पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह महज एक लापरवाही है या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि अगर पेपर बेचने के सबूत मिलते हैं, तो यह संगठित गड़बड़ी मानी जाएगी। फिलहाल, जबलपुर के छात्रों के बीच सबसे बड़ा डर दोबारा परीक्षा आयोजित होने को लेकर है। अगर शासन स्तर पर दोबारा परीक्षा का फैसला लिया जाता है, तो इससे न केवल बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ेगा, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होंगे।
