नई दिल्ली. रेलवे में डीपीआर चेक करने के लिए प्रतिदिन एक लाख के मानदेय पर अधिकारियों को रखने के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यही नहीं उन्हें परिवहन भत्ता अलग से मिलेगा. 18 मार्च तक इच्छुक सेवानिवृत्त अधिकारी आवेदन कर सकते हैं
भारतीय रेलवे ने अपने बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स की सुस्त रफ्तार और लगातार बढ़ते बजट पर लगाम लगाने के लिए यह पहल शुरू की है। रेलवे अपनी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को फाइनल करने से पहले उसकी बारीकी से जांच करवाएगा। इस जिम्मेदारी के लिए सेवानिवृत्त वरिष्ठ रेल अधिकारियों को सेक्टर एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया जा रहा है, जिन्हें प्रतिदिन एक लाख रुपये का मानदेय दिया जाएगा। इन्हें ही पैनल में शामिल करने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है।
तकनीकी खामी को करना होगा दूर
अक्सर देखा गया है कि निजी कंसल्टेंट्स द्वारा तैयार की गई प्रोजेक्ट रिपोर्ट में कई तकनीकी खामियां रह जाती हैं। काम शुरू होने के बाद जब जमीन पर अलाइनमेंट या डिजाइन बदलना पड़ता है, तो प्रोजेक्ट की लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं। इसी गड़बड़ी को रोकने के लिए सभी जोनल रेलवे में रिटायर अधिकारियों का एक पैनल बनाया जा रहा है।
नियुक्त अधिकारी को करना होगा ये काम
ये विशेषज्ञ बाहरी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट की कमियों को पकड़ेंगे और उसे धरातल के अनुकूल बनाएंगे। इस विशेष भर्ती के लिए भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा के उन सेवानिवृत्त अधिकारियों से आवेदन मांगे गए हैं। जिनकी आयु अधिकतम 75 वर्ष तक हो। जिनके पास रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव हो। इच्छुक उम्मीदवार 18 मार्च तक आनलाइन या डाक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
चयनित अधिकारियों को मैदानी इलाकों में हर 50 किलोमीटर और पहाड़ी क्षेत्रों में हर 30 किलोमीटर की रिपोर्ट जांचने के लिए एक दिन का समय निर्धारित है। एक दिन की इस सेवा के लिए विशेषज्ञ को एक लाख रुपये के साथ-साथ यात्रा और परिवहन भत्ता भी मिलेगा। ये एक्सपर्ट्स केवल फाइलें ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि साइट पर जाकर अलाइनमेंट, मिट्टी की गुणवत्ता, पुलों के डिजाइन और सुरक्षा मानकों (आरओबी-आरयूबी) की गहन जांच करेंगे।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत कार्य
रेलवे बोर्ड ने इसे फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया है। प्रत्येक जोनल रेलवे को तीन-तीन प्रोजेक्ट्स चुनने का निर्देश दिया गया है। अगले छह महीनों के फीडबैक के आधार पर इस व्यवस्था को भविष्य के सभी बड़े रेल प्रोजेक्ट्स के लिए अनिवार्य कर दिया जाएगा। इस कदम से न केवल रेलवे के अरबों रुपये बचने की उम्मीद है, बल्कि प्रोजेक्ट्स को समय सीमा के भीतर पूरा करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
