जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने प्रदेश सरकार पर बिजली दरों और स्मार्ट मीटर को लेकर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है। मंच ने निर्णय लिया है कि पूर्व क्षेत्र के लिए 24 फरवरी को नियामक आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली जनसुनवाई का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। यह फैसला 7 जनसंगठनों के संयुक्त विरोध प्रदर्शन का हिस्सा है। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि सरकार ने जनता से सस्ती बिजली और मुफ्त स्मार्ट मीटर का जो वादा किया था, जमीनी हकीकत उसके बिल्कुल उलट है।
सस्ती बिजली के बजाय 10.19 प्रतिशत दाम बढ़ाने का प्रस्ताव
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 22 सितंबर 2025 को वादा किया था कि जीएसटी रेट घटने और कोयले पर 400 रुपये प्रति टन कॉम्पेनसेशन सेस हटने से बिजली के दाम कम किए जाएंगे। उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि बिजली बिलों में राहत मिलेगी, लेकिन सरकारी बिजली कंपनियों ने इसके विपरीत बिजली की दरों में 10.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। यह कदम आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है और सरकार के पिछले आश्वासनों के साथ सीधा धोखा है।
फ्री स्मार्ट मीटर के वादे से भी पलटी सरकार
विरोध का दूसरा मुख्य कारण 'फ्री स्मार्ट मीटर' योजना है। पूर्व में सरकार ने वादा किया था कि स्मार्ट मीटरों की कीमत और स्थापना का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं वसूला जाएगा। प्रत्येक परिसर में सरकार अपने खर्च पर मीटर लगाएगी। लेकिन अब बिजली कंपनियों ने स्मार्ट मीटर का पूरा खर्च उपभोक्ताओं से ही वसूलने की योजना तैयार की है। मंच का कहना है कि इसी वादाखिलाफी के विरोध स्वरूप वे जनसुनवाई का बहिष्कार करेंगे। बैठक में रजत भार्गव, टीके रायघटक, डीके सिंह, सुभाष चंद्रा, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, पीएस. राजपूत, राजेश गिदरोनिया, एडवोकेट वेद प्रकाश अधौलिया, डीआर लखेरा, संतोष श्रीवास्तव, माया कुशवाहा, दिलीप कुंडे और केसी सोनी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
