खुशी कौर केस: हाईकोर्ट ने आईजी की रिपोर्ट को नकारा, रजिस्ट्रार की कस्टडी में एक साल तक रहेगी सील
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। न्यायालय ने पाया कि इस रिपोर्ट में उन महत्वपूर्ण पहलुओं और तथ्यों की कमी है, जिन्हें आवेदक द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था। न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने 'खुशी कौर बनाम मध्य प्रदेश राज्य' (MCRC No. 4158/2026) मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
अधूरी जानकारी और गायब तथ्यों पर कोर्ट सख्त
अदालत ने रिकॉर्ड का सूक्ष्मता से अवलोकन करने के बाद कहा कि रिपोर्ट में कई जरूरी तथ्य गायब हैं। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि संभवतः इन्हीं कमियों के कारण पूर्व में इस आवेदन का निपटारा त्रुटिवश कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान विशेष रूप से रायपुर से जबलपुर तक की एक सहकर्मी की यात्रा के विवरण का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में इस यात्रा का जिक्र करने का प्रयास तो हुआ है, लेकिन इसमें अभी भी पर्याप्त स्पष्टता और जानकारी का अभाव है। चूंकि इस मामले का ट्रायल अभी निचली अदालत में लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट ने इन पहलुओं पर अधिक विस्तृत चर्चा नहीं की, लेकिन भौतिक तथ्यों के स्पष्ट न होने पर चिंता जरूर जताई।
एक साल तक सीलबंद लिफाफे में रहेगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया और आदेश दिया कि आईजी द्वारा पेश की गई इस रिपोर्ट को रजिस्ट्रार (न्यायिक) के पास सीलबंद लिफाफे में जमा किया जाए। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि इस रिपोर्ट को कम से कम एक वर्ष की अवधि के लिए सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाए, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसका पुनः अवलोकन किया जा सके। रिपोर्ट दाखिल होने और सीलबंद करने के निर्देश के साथ ही कोर्ट ने फिलहाल इस संबंध में आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी है।
