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जबलपुर अजाक्स चुनाव विवाद: कोर्ट ने चुनाव अधिकारी पर किये आरोप तय,मुश्किलें बढ़ीं


इस मामले की गहराई से पड़ताल की तो पता चला कि जिस तिथि को वह आदेश जारी दिखाया गया था उस दिन प्रांताध्यक्ष भोपाल में उपस्थित ही नहीं थे।

जबलपुर। अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ यानी अजाक्स के जिला अध्यक्ष पद के निर्वाचन को लेकर हुए विवाद में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। यह मामला वर्ष 2014-15 के चुनाव सत्र से जुड़ा है जिसमें फर्जी दस्तावेज तैयार कर चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया गया था। इस प्रकरण में अब माननीय अष्टम सत्र न्यायाधीश जबलपुर की अदालत ने तत्कालीन चुनाव अधिकारी पीएल अहिरवार और योगेश चौधरी के विरुद्ध जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में आरोप तय करते हुए विचारण की कार्यवाही शुरू करने के आदेश दिए हैं।

​-प्रकरण कोर्ट तक क्यों पहुंचा

घटनाक्रम के अनुसार जबलपुर में अजाक्स के संगठन चुनाव के लिए पीएल अहिरवार को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया था। जिला अध्यक्ष पद के लिए देवेश चौधरी ने अपनी दावेदारी पेश की थी। निर्धारित समय सीमा तक किसी अन्य प्रत्याशी का आवेदन प्राप्त नहीं होने के कारण देवेश चौधरी का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा था। हालांकि चुनाव अधिकारी पीएल अहिरवार ने कथित रूप से योगेश चौधरी के साथ मिलकर एक षडयंत्र रचा ताकि निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया संपन्न न हो सके। इसके तहत कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षरों वाला एक आदेश फैक्स के जरिए भेजकर निर्वाचन प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया।

​जाली हस्ताक्षर से किया आदेश जारी

जब इस कार्यवाही पर देवेश चौधरी ने आपत्ति दर्ज कराई और मामले की गहराई से पड़ताल की तो पता चला कि जिस तिथि को वह आदेश जारी दिखाया गया था उस दिन प्रांताध्यक्ष भोपाल में उपस्थित ही नहीं थे। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उनके जाली हस्ताक्षर बनाकर फर्जी आदेश प्रसारित किया गया था। इस मामले की शिकायत पहले सिविल लाइन थाने और फिर पुलिस अधीक्षक व पुलिस महानिरीक्षक से की गई लेकिन आरोपियों पर कोई पुलिस कार्यवाही नहीं हुई। अंततः पीड़ित पक्ष ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया।अदालत ने दस्तावेजों और साक्ष्यों पर गौर करने के बाद पीएल अहिरवार और योगेश चौधरी के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 471, 120बी और 34 के तहत मुकदमा चलाने के निर्देश दिए हैं। इस कानूनी लड़ाई में देवेश चौधरी की ओर से राजेंद्र गुप्ता, गुरु साहू, भावना चौधरी और रुचिरा गुप्ता अभियोजन में सहयोग प्रदान करते हुए पैरवी कर रहे हैं।

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