अब आउटसोर्स स्टाफ के बच्चे भी ‘पालनाघर’ में पाएंगे सुरक्षित और स्नेहभरा ठिकाना,अफसरों के फैसले का हर तरफ स्वागत
जबलपुर। जहां कई संस्थाएँ बाल दिवस पर केवल औपचारिक कार्यक्रम कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती हैं, वहीं पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने इस दिवस को वास्तविक अर्थों में सार्थक बना दिया। कंपनी ने एक ऐसा मानवीय निर्णय लिया है, जिसने केवल बच्चों ही नहीं बल्कि सैकड़ों परिवारों के दिलों को छू लिया है,अब कंपनी का ‘पालना घर’ (क्रेच) आउटसोर्स कर्मचारियों के बच्चों के लिए भी खोल दिया गया है।यह निर्णय केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि एक संवेदना है। संदेश यह किसंस्था सिर्फ भवनों से नहीं, इंसानियत से चलती है।
-कंपनी बनी प्रदेश में पहली मिसाल
प्रबंध संचालक अनय द्विवेदी ने वह काम कर दिखाया जिसे वर्षों से ‘संभव’ नहीं माना गया था। कंपनी अब प्रदेश की पहली विद्युत वितरण कंपनी बन गई है जिसने नियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों के बच्चों को एक समान सुविधा देने का साहसिक निर्णय लिया है।अब 6 माह से 12 वर्ष तक के बच्चे एक ही छत के नीचे सुरक्षित वातावरण,समान देखभाल,सीखने–खेलने की सुविधाएँ और प्यार भरा माहौल प्राप्त करेंगे।
-कम्पनी एक परिवार है
मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन एवं प्रशासन) सम्पदा सराफ गुर्जर ने कहा हम केवल सुविधाएँ नहीं बढ़ा रहे, हम दीवारें हटा रहे हैं। हर कर्मचारी का परिवारकंपनी का परिवार है।यह पहल उस महत्वपूर्ण सच्चाई को स्वीकार करती है कि नियमित हो या आउटसोर्स, वेतनमान चाहे जो हो,माँ–बाप की चिंता एक जैसी होती है कि बच्चा सुरक्षित है या नहीं?अब काम पर आने वाले माता–पिता निश्चिंत होकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकेंगे।
यह केवल सुविधा नहीं, सम्मान भी
जब इस निर्णय की जानकारी आउटसोर्स कर्मचारियों तक पहुँची तो कई की आँखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि हमें लगा था कि ऐसी सुविधाएँ सिर्फ बड़े कर्मचारियों के लिए होती हैं। आज कंपनी ने हमें बताया कि हम भी इस परिवार का हिस्सा हैं। नियमित कर्मचारियों ने भी इसे स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि कंपनी ने दूरी ही नहीं, भेदभाव भी मिटा दिया। एक निर्णय… जो पूरा सिस्टम बदल देगा

