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मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट, ग्वालियर, सहित 8 जिलों में गिरेगा पानी,

 

भोपाल। मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्से के ग्वालियर-छतरपुर सहित 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं दूसरी ओर उत्तरप्रदेश की यमुना नदी का जलस्तर बढऩे से एमपी के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी उफान पर रही। इस कारण 100 से ज्यादा दुकानों में पानी भर गया।

                        मौसम विशेषज्ञों की माने तो उत्तरी हिस्से के ऊपर से एक ट्रफ व साइक्लोनिक सर्कुलेशन की एक्टिविटी है। इसका असर प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है। इस वजह से ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ व छतरपुर में भारी बारिश का अलर्ट है। इन जिलों में अगले 24 घंटे में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। पिछले सप्ताह प्रदेश में बाढ़ के हालात बने। खासकर पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, शहडोल व सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया। खेत-मंदिर व पुल डूब गए। दो दिन से बारिश थमी रही लेकिन नर्मदा नदी उफान पर है। वहीं डैम ओवरफ्लो है। 

एमपी में अब तक 28 इंच से ज्यादा बारिश

मध्यप्रदेश के ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मुरैना व श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो गया है। यहां सामान्य से 50 प्रतिशत तक ज्यादा पानी गिर चुका है। गुना, टीकमगढ़-निवाड़ी में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। जबकि इंदौर में सबसे कम पानी गिरा है। उज्जैन संभाग की तस्वीर भी ठीक नहीं है। वहीं भोपाल व जबलपुर में सीजन की आधी बारिश हुई है।  जून से अब तक औसत 28.4 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि 19 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 9.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मानसून सीजन दो महीने बीत चुके हैं। इस दौरान प्रदेश में सामान्य की 76 प्रतिशत बारिश हो गई है।

एमपी में अब तक इतनी बारिश

मानसून को अभी करीब दो महीने बचे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि अगस्त में ही बारिश का कोटा फुल हो जाएगा। बता दें कि मौसम विभाग ने अबकी बार सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है।

भोपाल में 2006 में अगस्त में 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड-

भोपाल में अगस्त में मानसून जमकर बरसता है। इस महीने राजधानी में औसत साढ़े 35 इंच तक बारिश हो चुकी है, जो साल 2006 में हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश करीब 12 इंच 14 अगस्त 2006 को हुई थी। पिछले सालों की बात करें तो 2015 और 2022 में 30 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। 

इंदौर में 1944 में गिरा था 28 इंच पानी-

इंदौर में अगस्त महीने में औसत 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड हैए जो साल 1944 में दर्ज किया गया था। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 22 अगस्त 2020 को बनाया था। इस दिन साढ़े 10 इंच पानी गिरा था। पिछले 10 साल में दो बार 17 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है।

ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड-

ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 10 अगस्त 1927 को बना था। सर्वाधिक मासिक बारिश वर्ष 1916 में 28 इंच हुई थी। इस महीने की औसत बारिश साढ़े 9 इंच है। एवरेज 12 दिन बारिश होती है।

जबलपुर में 102 साल पहले गिरा था 44 इंच पानी-

जबलपुर में एक महीने में 44 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। 102 साल पहले यानी  वर्ष 1923 में अगस्त महीने में बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसी साल 20 अगस्त को 24 घंटे में ही 13 इंच बारिश हुई थी। यहां बादल फटने जैसी स्थिति बनी थी।  जबलपुर में इस महीने की औसत बारिश 18 इंच है। करीब 16 दिन तक पानी गिरता है। पिछले 10 साल की बात करें तो साल 2019 में यहां 30.61 इंच बारिश हुई थी।

उज्जैन में अगस्त में जमकर होती है बारिश-

उज्जैन में साल 2006 में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड बना था। इस साल अगस्त महीने में करीब 35 इंच बारिश हुई थी। इसी साल 24 घंटे में सर्वाधिक 12 इंच बारिश का रिकॉर्ड 10 अगस्त को बना था। उज्जैन में अगस्त की औसत बारिश 10 इंच है। 10 से 11 दिन यहां बारिश होती है।


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