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तिलक के ऊपर क्यों लगाते हैं चावल के दाने, जानें क्या है इसका ज्योतिषीय कारण और महत्व



सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार, किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा-पाठ के दौरान माथे पर तिलक लगाना शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि बिना तिलक लगाए पूजा-पाठ करना अशुभ होता है. मान्यता है कि सही विधि से तिलक लगाने पर देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके अलावा तिलक लगाने के जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है. आमतौर पर जब घर-परिवार में किसी प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है मस्तक पर तिलक लगाकर उस पर अक्षत लगाया जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं तिलक के ऊपर अक्षत क्यों लगाए जाते हैं और इसका क्या धार्मिक महत्व है, अगर नहीं तो चलिए जानते हैं.

धर्मशास्त्रों के अनुसार, मस्तक पर तिलक लगाने से मंगल होता है. तिलक लगाने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं. कहते हैं कि मस्तिष्क के बीच में गुरु यानी बृहस्पति का वास होता है. इसलिए माथे पर तिलक लगाने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और उसकी अनुकूलता प्राप्त होती है. इसके अलावा तिलक से हमारे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है, जिससे मस्तिष्क बिल्कुल शांत रहता है.

तिलक के ऊपर क्यों लगाना चाहिए अक्षत


धार्मिक परंपरा और धर्म-शास्त्र के नियमों के मुताबिक, मस्तक पर तिलक लगाने के दौरान हमेशा अक्षत का प्रयोग करना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इसके बिना तिलक अधूरा माना जाता है. धर्मशास्त्रों के अनुसार, तिलक के ऊपर लगाया जाने वाला अक्षत धन-धान्य का प्रतीक है. इसके अलावा अक्षत सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा को खींचकर पूरे शरीर में प्रवाहित करता है. तिलक में अक्षत का इस्तेमाल करने से धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है.

तिलक के ऊपर ना लगाएं ऐसे अक्षत

ज्योतिष शास्त्र के जानकार बताते हैं कि तिलक लगाते वक्त टूटे हुए चावल यानी अक्षत का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. दरअसल, तिलक में टूटे हुए चावल का इस्तेमाल करने से नकारात्मक ऊर्जा हावी हो सकती है. तिलक में टूटे हुए चावल का इस्तेमाल करना अशुभ माना जाता है.

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