जिनेवा. अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर नया मोड़ सामने आया है. जिनेवा में प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षरों से पहले ही दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया. दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होने थे, लेकिन उससे पहले ही एमओयू पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर किए गए.
प्रारंभिक योजना के अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होने थे. हालांकि मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच समय से पहले सहमति बनाने पर चर्चा हुई थी. रिपोर्टों के अनुसार इसका एक प्रमुख कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द से जल्द खोलने की आवश्यकता थी. माना जा रहा है कि समझौते की अधिकांश शर्तों पर दोनों पक्ष पहले ही सहमत हो चुके थे और केवल औपचारिक प्रक्रिया बाकी थी. ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के जरिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया.
हस्ताक्षरों को लेकर सामने आए अलग-अलग दावे
समझौते की प्रक्रिया को लेकर कई तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों देशों ने सहमति के तहत अपने-अपने राष्ट्रपतियों से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए. राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक कार्यक्रम के दौरान दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. समझौते के तहत ईरान में युद्ध समाप्त होगा और लेबनान में भी संघर्ष खत्म करने की बात कही गई है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने की बात कही गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से कमर्शियल जहाजों के लिए खोलना है। यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसके खुलने से वैश्विक तेल और व्यापारिक परिवहन को राहत मिलने की संभावना है।
