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युद्ध की कड़वाहट ने छीनी फलों की मिठास: जबलपुर मंडी से कीवी गायब,आम भी मुश्किल में

 


जबलपुर। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक व्यापारिक गलियारों में अशांति पैदा कर दी है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के मध्य छिड़ी इस जंग का सीधा प्रभाव अब जबलपुर सहित मध्य प्रदेश के स्थानीय फल बाजारों पर दिखने लगा है। जबलपुर की थोक मंडियों में विदेशी फलों की आवक नगण्य हो गई है, जिससे आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय फलों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

​समुद्री व्यापारिक मार्ग बाधित होने से टूटी सप्लाई चेन

​ईरान द्वारा जल डमरू मध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर लगाए गए प्रतिबंधों और सुरक्षा कारणों से मालवाहक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। इस मार्ग के अवरुद्ध होने से खाड़ी देशों से आने वाले अंगूर और कीवी जैसे प्रीमियम फलों की खेप भारत नहीं पहुंच पा रही है। जबलपुर मंडी, जो कि संभाग का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र है, वहां पिछले कुछ दिनों से विदेशी फलों का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। सप्लाई चेन के इस तरह अचानक ध्वस्त होने से थोक व्यापारियों के साथ-साथ फुटकर विक्रेताओं के सामने भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।

​औषधि के रूप में प्रयुक्त कीवी की किल्लत से मरीज परेशान

​युद्ध के कारण सबसे अधिक संकट कीवी की उपलब्धता पर पड़ा है। चिकित्सा जगत में कीवी का उपयोग उन मरीजों के लिए अनिवार्य माना जाता है जिनके रक्त में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। गर्मी के मौसम में डेंगू और अन्य संक्रमणों के चलते इसकी मांग 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, लेकिन वर्तमान में यह फल मंडियों से नदारद है। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते इस अंतर के कारण मरीजों के परिजनों को शहर की एक मंडी से दूसरी मंडी भटकना पड़ रहा है। कीवी के साथ ही अन्य आयातित फलों की कमी ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।

​आम के निर्यात पर मंदी, किसानों को आर्थिक नुकसान

​वैश्विक तनाव का दोहरा असर अब भारतीय आम उत्पादकों पर भी पड़ रहा है। भारत के आम की खाड़ी देशों और यूरोपीय बाजारों में अत्यधिक मांग रहती है, परंतु जलमार्गों के असुरक्षित होने से आम की बड़ी खेप विदेशों में नहीं भेजी जा पा रही है। निर्यात रुकने के कारण स्थानीय मंडियों में आम की आवक बढ़ेगी, जिससे कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट आने की संभावना है। व्यापारियों का अनुमान है कि यदि स्थिति जल्दी सामान्य नहीं हुई तो निर्यातकों को करोड़ों का घाटा होगा और इसका सीधा वित्तीय बोझ आम उत्पादक किसानों पर पड़ेगा, जिन्हें फसल की उचित कीमत नहीं मिल पाएगी।

​जबलपुर सहित प्रदेश की फल मंडियों में छाई व्यापारिक सुस्ती

​जबलपुर की प्रमुख फल मंडियों में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी इस खींचतान ने न केवल फलों के दामों को प्रभावित किया है, बल्कि बाजार की क्रय शक्ति को भी धीमा कर दिया है। व्यापारियों के अनुसार व्यापार में छाई यह मंदी केवल जबलपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसी बड़ी मंडियों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यदि युद्ध की अवधि और लंबी खिंचती है, तो फल बाजार में अनिश्चितता का दौर और गहरा सकता है, जिससे आगामी त्यौहारों और शादी-ब्याह के सीजन में फलों की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

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