जबलपुर। अब ये तय हो चुका है कि जल्दी ही राज्य सरकार मंडलएआयोग और प्राधिकरण में नेताओं की नियुक्ति करेगी। जबलपुर के भाजपा नेताओं ने एड़ी.चोटी का जोर लगा दिया है और सब कुछ को दावेदार मान रहे हैं। जिन नेताओं को बधाईयां दी जा रही हैंए वे ज्यादा खुश हैं। जबलपुर में भी भाजपा संगठन के चेहरों की चमक लौट आई हैएक्योंकि वे सालों से पार्टी की सेवा कर रहे हैंएलेकिन उन्हें उसका पारितोषिक अब तक नहीं मिला है।
-अब तक क्या तय हुआ
बहरहाल, खबर है कि मप्र भाजपा संगठन और मप्र सरकार के नुमाइंदे भरपूर विचार-विमर्श करने के बाद कुछ नाम पुख्ता कर चुके हैं। कुछ नाम ऐसे भी हैंए जिन्हें लेकर यह तय होना बाकी है कि इनकी आगामी भूमिका संगठन में ही निर्धारित की जाए या फिर निगमए मंडलए प्राधिकरण आदि में काम करने का अवसर दिया जाए। जबलपुर के दर्जन भर से नाम हवा में हैएलेकिन इनमें से जमीन पर कौन आ सकेगाए ये कहना बहुत चुनौतीपूर्ण है। हालाकिए इसके लिए अभी काफी लंबी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
-जाति और क्षेत्र से होगा निर्णय
ये राजनीतिक नियुक्तियां 2024 के बाद से रुकी हुई हैं और कई अहम कुर्सियां तो ऐसी हैं जो साल 2021 से ही रिक्त हैं। क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को देखते हुए ये नियुक्तियां की जाएंगी। नियुक्तियां एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से होंगी। वर्तमान में निगमए मंडल - आयोग के अध्यक्ष संबंधित विभाग के मंत्री हैं या फिर वरिष्ठ अधिकारी। प्रदेश में वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 से अधिक नियुक्तियां निगम- मंडल- आयोग और प्राधिकरणों में की थीं । चुनावी वर्ष यानी 2023 में फिर नियुक्तियां की गईं। कुछ नए प्राधिकरण बनाए गए।
-सत्ता बदलने के बाद बदले समीकरण
मोहन सरकार ने सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद यानी जनवरी.फरवरी 2024 में निगम.मंडलों के अध्यक्षों को हटा दिया और संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव को पदेन अध्यक्ष बना दिया। राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर दबाव भी बनता रहा लेकिन कोई निर्णय न होने की स्थिति में सितंबर 2024 में अधिकारियों के स्थान पर विभागीय मंत्रियों को जिम्मेदारी दे दी गई। तभी से नियुक्तियों को लेकर तब-जब अटकलें लगाई जाती रहीं।
-शिकायतें... असंतोष और नाराजगी
दरअसल ये नियुक्तियां संगठन के नेताओं को उपकृत करने का माध्यम मानी जाती हैं। टिकट आदि से वंचित रहे नेताओं को इन नियुक्तियों के बहाने साधा जाता है। नियुक्तियां न होने से संगठन में असंतोष भी रहता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में हेमंत खंडेलवाल की नियुक्ति के साथ ही एक बार फिर निगमए मंडल आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्ति की कवायद तेज हो गई है। माना जा रहा है कि पिछले दिनों हुए कुछ नामों को लेकर सहमति भी बन चुकी है। चूंकि सरकार एक साथ नियुक्ति के पक्ष में नहीं है इसलिए क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से सूचियां निकाली जाएंगी।
-बधाईयों का सिलसिला शुरु
जबलपुर जिले में आयोग -निगम और मंडल और प्राधिकरण के दावेदारों में दर्जनों नाम हवा में है। रोज ही नए नाम जुड़ रहे हैं और उन्हें बधाईयां भी दी जा रही हैं। ये वो समय है जब भाजपा में पूर्वानुमान लगाना सबसे कठिन है तब इन अग्रिम बधाईयों से नेता डरे हुए हैं। एक नेता का नाम सबसे ऊपर है जो भाजपा के नगर संगठन में अहम पद पर रहे और एक जनप्रतिनिधि के बड़े निकटतम भी हैं। संगठन के सीनियर पदाधिकारी और विधायक की टिकट के सदैव दावेदार रहे एक चेहरे को भी जबलपुर में एक महत्वपूर्ण कुर्सी मिलने की संभावनाएं जताईं जा रही हैं। इस तरह से भाजपा में बधाईयों का आदान.प्रदान जारी है। हकीकत ये है कि प्रदेश संगठन किसके नाम पर मुहर लगाएगाए ये किसी को खबर नहीं है।
