khabar abhi tak

शारदीय नवरात्र की दस्तक, मिट्टी के सांचे में उतर रहा देवी का वैभव



जबलपुर।शारदीय नवरात्र पर्व को लेकर मूर्तिकारों और उत्सव समितियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शहर भर की कार्यशालाओं में दिन-रात मिट्टी की मूर्तियों को गढ़ा जा रहा है। कोलकाता के बाद जबलपुर की देवी प्रतिमाओं की अपनी अलग पहचान मानी जाती है। स्थानीय कलाकारों की गढ़ी प्रतिमाओं की मांग मध्य प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी बनी हुई है। विभिन्न जिलों जैसे सतना, रीवा, अशोकनगर, नर्मदापुरम, रायपुर, बांदा, नरसिंहपुर, गाडरवारा, करेली, गोटेगांव, कटनी, दुर्ग, भिलाई, गुना, मुंगावली, सिवनी और शहडोल से समितियां वाहन लेकर प्रतिमाएं लेने आ रही हैं। पंडालों के लिए मां दुर्गा के संहारक और भव्य दरबार रूपों के अलावा मां काली के स्वरूपों की रचना भी जारी है।

​हाथों की नक्काशी से खिल रही देवी मुखाकृति

​संस्कारधानी के शिल्पकार मिट्टी की मूर्तियों में प्राण फूंकने के लिए पारंपरिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। कलाकारों का पूरा ध्यान माता के चेहरे की भाव-भंगिमा, आंखों की चमक और वस्त्र सज्जा पर केंद्रित रहता है। माथे पर मुकुट, पारंपरिक आभूषण और बारीक कारीगरी का काम हाथों से किया जा रहा है। कारीगरों का कहना है कि प्राकृतिक मिट्टी से देवी स्वरूप को इस तरह ढाला जाता है कि वे पूर्ण रूप से जीवंत दिखाई देने लगती हैं। कई दशकों से चली आ रही इस शिल्प कला के कारण जबलपुर की मूर्तियों की लोकप्रियता बहुत अधिक है। कार्यशालाओं में अब मूर्तियों को अंतिम रूप देने के साथ-साथ विशेष रंगों से सजाने का काम चल रहा है। समय पर डिलीवरी देने के लिए कारीगर बिना रुके काम में जुटे हुए हैं।

​अंतरराज्यीय स्तर पर मूर्तियों की भारी मांग 

​दुर्गा पूजा उत्सव के अवसर पर इस बार विभिन्न पंडालों में अलग-अलग झांकियां देखने को मिलेंगी। इनमें महिषासुर मर्दिनी के रूप में राक्षसों का दलन करती शक्ति की छवि और विशाल दरबारी ठाट-बाट प्रमुख हैं। कई जगहों पर मां काली की रौद्र एवं भव्य प्रतिमाएं भी स्थापित की जा रही हैं। बाहर के शहरों से उत्सव समितियों के पदाधिकारी महीनों पहले आकर अपनी पसंद के अनुसार मूर्तियों की बुकिंग करा लेते हैं। सीमावर्ती राज्यों और आसपास के संभागों से बड़ी संख्या में लोग वाहन लेकर डिलीवरी लेने पहुंच रहे हैं। पंडाल निर्माण के काम में भी तेजी आ गई है, ताकि निर्धारित समय पर घटस्थापना की जा सके। मूर्तिकला के इन केंद्रों पर मिट्टी, बांस और रंगों के बीच आस्था को साकार रूप दिया जा रहा है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak