पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि रसिक दुलारी शरण ने छत से कूदकर जान दी। हालांकि, उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसकी वजह अभी पता नहीं चल सकी है। पुलिस इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए अलग-अलग एंगल से जांच कर रही है। अब तक 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ भी कर चुकी है।
प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, खाना खा रहा था, तभी आई तेज आवाज
गुरु कृपा कुंज के सामने रहने वाले प्रत्यक्षदर्शी छोटू का कहना है कि 25 सितंबर की सुबह करीब साढ़े 10 बजे वह खाना खा रहा था। तभी अचानक तेज धड़ाम की आवाज आई। वह दौड़कर बाहर आया तो जमीन पर एक साधु पड़े दिखाई दिए। उनके सिर से खून निकल रहा था। छोटू ने बताया कि वह कुछ समझ पाता, इससे पहले आश्रम से जुड़े कुछ साधु जैसे लोग वहां पहुंचे। जमीन पर पड़े साधु को करीब 5 लोग निजी गाड़ी में ले गए। छोटू ने बताया कि वह साधु उस समय जिंदा थे या उनकी मौत हो चुकी थी, यह वह नहीं बता सकता, क्योंकि महाराज के शिष्यों ने उसे पास नहीं जाने दिया।
2 घंटे तक चला इलाज-
घटना के बाद रसिक दुलारी शरण को मथुरा में गोकुल रेस्टोरेंट के पास स्थित सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी खुली चोटों का इलाज शुरू किया और टांके लगाए। प्राइवेट पार्ट से काफी खून बह रहा था। डॉक्टरों ने करीब 2 घंटे तक इलाज किया, लेकिन रसिक दुलारी शरण की जान नहीं बचाई जा सकी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम अस्पताल पहुंची। साधु की हालत बेहद गंभीर थी और वह बयान देने की स्थिति में नहीं थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम कराया।
5 टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारी
बताया गया है कि मामले की जांच के लिए 5 टीमें बनाई गई हैं। इसके अलावा वृंदावन थाना पुलिस और फोरेंसिक टीम अपने स्तर से सबूत जुटा रही हैं। टीमें अपने स्तर पर जांच व पूछताछ में जुटी है लेकिन अभी तक मौत के कारणों का पता नहीं चल सका है।