जबलपुर। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक आज उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब स्वयं जिम्मेदार अफसर मौजूद नहीं रहे। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ, मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस, मध्य प्रदेश लिपिक वर्ग कर्मचारी संघ और मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के अटल उपाध्याय, विश्वदीप पटेरिया, योगेश चौधरी, आशीष तिवारी, मुकेश चतुर्वेदी, सुनील पचौरी, इंद्र पूरी गोस्वामी, मूलचंद अहिरवार एवं विजय शंकर बाजपेई नियत समय पर पहुंचे थे। शाम 7 बजे तक प्रतीक्षा के बाद भी अधिकारी के न आने से नाराज पदाधिकारियों ने बैठक का पूर्ण बहिष्कार कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि यह आयोजन उनकी सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान का प्रमुख जरिया है, जिस पर अफसरों की यह बेरुखी सीधे-सीधे अनदेखी को दर्शाती है।
सात दिनों में दोबारा बैठक बुलाने की रखी मांग
कर्मचारी नेताओं ने प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये पर कड़ा एतराज जताया। उनका तर्क था कि इस समिति का गठन मैदानी अमले के लंबित प्रशासनिक प्रकरणों, वेतन विसंगतियों, सेवा शर्तों और कार्यस्थल से जुड़ी दिक्कतों को उच्च स्तर पर सुलझाने के उद्देश्य से किया गया है। जब विभाग का मुखिया ही ऐसे अहम मंच से नदारद रहेगा, तब आम शिक्षकों व लिपिक संवर्ग की सुनवाई कैसे होगी। इस पूरी कवायद से शासन के समय के साथ-साथ दूर-दराज से पहुंचे संघ प्रतिनिधियों का श्रम भी व्यर्थ हुआ। प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कार्यप्रणाली पर गहरा रोष जताया और स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के स्वाभिमान व हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
समय पालन सुनिश्चित करने की दी सख्त हिदायत
प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से अपेक्षा की है कि आगामी बैठकों में केवल औपचारिकता न निभाई जाए, बल्कि तय एजेंडे पर सार्थक बातचीत हो। उन्होंने साफ लफ्जों में चेताया कि भविष्य में इस तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि विभाग वास्तव में कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर संजीदा है, तो संबंधित शाखा प्रभारियों और लिपिकों को पूरी तैयारी के साथ टेबल पर बैठना होगा, ताकि फाइलों का तुरंत निपटारा किया जा सके। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि अधिकारी की गैरहाजिरी से उपजा असंतोष तभी थमेगा, जब तय समयावधि के भीतर दोबारा चर्चा शुरू कर लंबित मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का ठोस भरोसा दिलाया जाए।
