27 मृत बच्चों के परिजनों को पक्षकार बनाने के न्यायिक निर्देश के बाद बदला कानूनी रुख
जबलपुर। छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में घटित चर्चित कफ सिरप कांड से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही में नया घटनाक्रम सामने आया है। मामले के मुख्य आरोपी डॉक्टर प्रवीण कुमार सोनी ने उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर अपनी वह याचिका वापस ले ली है, जिसके तहत उन्होंने पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और अदालत में पेश चार्जशीट को निरस्त करने की गुहार लगाई थी। यह मामला परासिया के उस गंभीर घटनाक्रम से संबंधित है, जिसमें दूषित या संदिग्ध कफ सिरप के उपयोग से 27 मासूम बच्चों की जान चली गई थी। आरोपी चिकित्सक ने अपने ऊपर दर्ज आपराधिक प्रकरण को चुनौती देते हुए राहत चाही थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने पूरे मामले की गंभीरता और मानव जीवन की हुई क्षति का ब्योरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। शासन ने पीठ को बताया कि घटना में कुल 27 बच्चों की असमय मृत्यु हुई है और उनके परिजन इस पूरे आपराधिक कृत्य से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
पीड़ित परिवारों को पक्षकार बनाने का निर्देश और याचिका वापसी का आवेदन
शासन के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि घटना में जान गंवाने वाले सभी 27 बच्चों के माता-पिता अथवा अभिभावकों को इस मामले में आवश्यक पक्षकार बनाया जाए। इस न्यायिक आदेश के बाद प्रकरण की दिशा पूरी तरह बदल गई, क्योंकि अभी तक पीड़ित पक्ष सीधे तौर पर इस याचिका में शामिल नहीं था। परिजनों को पक्षकार बनाए जाने के निर्देश जारी होते ही आरोपी डॉक्टर की ओर से याचिका को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया गया। आरोपी के सगे बड़े भाई अयोध्या प्रसाद सोनी ने अदालत में एक औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया, जिसके साथ शपथ-पत्र भी संलग्न किया गया। आवेदन में यह उल्लेख किया गया कि वर्तमान परिस्थितियों में याचिकाकर्ता इस याचिका को आगे जारी नहीं रखना चाहता है। साथ ही यह निवेदन भी किया गया कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर नए सिरे से कानूनी उपचार प्राप्त करने और नई याचिका लगाने का विधिक अधिकार सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने इस आवेदन को स्वीकार करते हुए याचिका नस्तीबद्ध कर दी।
