जबलपुर। जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित शहपुरा जनपद के दुर्गानगर में बरगी बांध परियोजना से 40 वर्ष पूर्व विस्थापित 1500 की आबादी वाले 100 से अधिक परिवारों ने प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ खुद 2 किलोमीटर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया है। जिला पंचायत सदस्य रामकुमार सैयाम और रामकुमार मेश्राम द्वारा 10 वर्षों में कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत और बरगी विधायक नीरज सिंह को 100 से ज्यादा आवेदन व जनसुनवाई में गुहार लगाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। अब भीमा बाई और सोनू राजपूत सहित 100 से अधिक महिला, पुरुष, बच्चे व दिव्यांग अपनी जेब से राशि जुटाकर मुरम-पत्थर बिछा रहे हैं, ताकि एंबुलेंस, प्रसूताओं और स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों की राह सुगम हो सके।
बरसात में दलदल बनते रास्तों ने रोकी सांसे
बरसात के दिनों में इस इलाके का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता है। सबसे विकट स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बनती है, क्योंकि उबड़-खाबड़ और कीचड़युक्त रास्तों के चलते 108 एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच पाती। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव कराने के लिए डिलीवरी की तारीख से कई दिन पहले ही मजबूरी में दूसरे गांवों में जाकर शरण लेनी पड़ती है। इसके अलावा कीचड़ के कारण बच्चों की पढ़ाई ठप पड़ जाती है और वे हफ्तों तक स्कूल नहीं जा पाते। ग्रामीण अपनी रोजमर्रा की मजदूरी पर जाने से पहले रोजाना सुबह ढाई से तीन घंटे पसीना बहाकर मुरम व गिट्टी डालकर रास्ता समतल कर रहे हैं, ताकि पैदल व दोपहिया वाहनों की आवाजाही संभव हो सके।
फाइलों में दबा रहा विस्थापितों का बुनियादी अधिकार
जिला पंचायत की बैठकों में इस जर्जर रास्ते का मुद्दा तीन से चार बार लिखित प्रस्ताव के साथ उठाया गया था, किंतु धरातल पर कोई प्रगति नहीं हुई। जनसुनवाई से लेकर आला अधिकारियों तक केवल निरीक्षण का भरोसा ही मिलता रहा। अब ग्रामीणों के इस सामूहिक कदम के बाद बरगी विधायक नीरज सिंह ने बजट प्रावधान कराने की बात कही है, वहीं जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने भी वस्तुस्थिति का संज्ञान लेते हुए शीघ्र निर्माण कराने का दावा किया है।
