जबलपुर। केंट विधानसभा क्षेत्र में शनिवार को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत शासकीय योजनाओं की मैदानी हकीकत जानने के लिए वृहद स्तर पर निरीक्षण किया गया। इस अभियान के दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अशोक रोहाणी और नगर निगम अध्यक्ष रिकुं विज ने कमान संभाली। उनके साथ कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय तथा नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इन सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के दलों ने क्षेत्र के स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों, राशन दुकानों और छात्रावासों का सघन भ्रमण किया। आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी स्थानीय समस्याएं सुनी गईं और शासकीय कार्यक्रमों के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर निर्देश दिए गए।
अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं का जायजा लिया
रांझी स्थित सिविल अस्पताल पहुंचकर वहां मौजूद स्वास्थ्य सुविधाओं को गहराई से परखा गया। ओपीडी से लेकर वार्डों तक मरीजों को मिल रहे इलाज और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली को विस्तार से देखा गया। परिसर में चल रहे नवीन भवन के निर्माण कार्य की गुणवत्ता तथा उसकी प्रगति भी जांची गई। संबंधित अमले को स्पष्ट तौर पर निर्देशित किया गया कि उपचार के लिए आने वाले हर जरूरतमंद व्यक्ति को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं बिना किसी देरी के मिलनी चाहिए। स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदारों से चर्चा करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि संसाधनों का अधिकतम उपयोग जनता के हित में हो। इस संवेदनशील कार्य में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली क्षम्य नहीं होगी और नए भवन का काम भी पूरी गुणवत्ता के साथ तय अवधि के भीतर पूरा किया जाना अनिवार्य है।
जल संयंत्र पहुंचकर शुद्धिकरण प्रक्रिया को परखा गया
क्षेत्रीय नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पीने का पानी निरंतर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रांझी इलाके में संचालित जल शोधन संयंत्र की आंतरिक व्यवस्थाएं जांची गईं। वहां पानी साफ करने की संपूर्ण यांत्रिक प्रक्रिया तथा फिल्टर प्लांट के संचालन का तरीका समझा गया। संयंत्र से जुड़ी पुरानी शिकायतों के निराकरण के लिए अपनाए गए तरीकों का रजिस्टर भी चेक किया गया। पानी के नियमित सैंपल लेने और प्रयोगशाला में उसकी वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने तक की पूरी प्रणाली की बारीकी से समीक्षा की गई। मौके पर मौजूद तकनीकी अमले को सख्त हिदायत दी गई कि पानी की गुणवत्ता जांचने की प्रक्रिया शत प्रतिशत पारदर्शी और व्यवस्थित होनी चाहिए। हर दिन लिए जाने वाले पेयजल नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में आनी चाहिए। वरिष्ठ स्तर से इसकी लगातार मॉनिटरिंग भी बेहद जरूरी है ताकि आम जनमानस तक शुद्ध पेयजल पहुंच सके।
