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घमापुर फ्लाईओवर निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, प्रोजेक्ट अब पकड़ेगा रफ्तार

जबलपुर। शहर के सर्वाधिक व्यस्ततम इलाकों में शुमार घमापुर और आंबेडकर चौक पर बीते 5 वर्षों से लंबित फ्लाईओवर परियोजना को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती के बाद नई गति मिली है। क्षेत्रीय विधायक लखन घनघोरिया द्वारा वर्ष 2025 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान शासन ने क्षेत्र के यातायात दबाव और अतिक्रमण का प्रारंभिक आकलन न्यायालय के समक्ष पेश किया। अदालत ने मामले में विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त समय प्रदान किया है। इस बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड मार्ग के निर्माण से जिला न्यायालय, कलेक्ट्रेट और अस्पताल मार्ग पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम से स्थानीय जनता को स्थाई मुक्ति मिलने की उम्मीद बंधी है। प्रशासनिक स्तर पर अब नए सिरे से तकनीकी खाका खींचा जा रहा है।

हाईकोर्ट ने सुझाया पर्यटन कार्यालय से नया रूट

​प्रारंभिक परियोजना के अंतर्गत यह एलिवेटेड कॉरिडोर होटल ऋषि एजेंसी से प्रारंभ होकर रद्दी चौकी होते हुए अब्दुल हमीद चौक तक निर्मित होना प्रस्तावित था। याचिकाकर्ता विधायक ने भी मदार टेकरी से मार्ग विकसित करने की वकालत की थी। हालांकि, यातायात के दबाव को संतुलित रखने के उद्देश्य से हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश टूरिज्म कार्यालय से काम शुरू कर घमापुर चौराहे के आगे उतारने का वैकल्पिक सुझाव दिया है। लोक निर्माण विभाग इस नए विकल्प की व्यवहार्यता का गहन तकनीकी परीक्षण कर रहा है। आगामी सुनवाई में शासन द्वारा अंतिम संरेखण और विस्तृत प्रस्ताव पीठ के समक्ष पेश किया जाएगा, जिससे परियोजना के अंतिम स्वरूप पर मुहर लगेगी।

देरी से बढ़कर 269 करोड़ हुई लागत

​प्रशासनिक लेचलतीफी के चलते इस आधारभूत परियोजना का वित्तीय बोझ अत्यधिक बढ़ गया है। पूर्व में 11 दिसंबर 2019 को इस पुल के निर्माण हेतु 186.03 करोड़ रुपये का प्रारंभिक वित्तीय प्राक्कलन तैयार किया गया था। लंबे समय तक फाइलें अटकी रहने के कारण 28 जुलाई 2022 को संशोधित मानचित्र के साथ इसकी अनुमानित लागत बढ़ाकर 269.22 करोड़ रुपये कर दी गई। विधायक द्वारा वर्ष 2021 से 2024 के मध्य विधानसभा में लगातार प्रश्न उठाने और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने के बाद भी धरातल पर कार्य शुरू नहीं हो सका था। देरी के कारण सरकारी धन पर पड़े 83.19 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भार को अदालत में प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।

अतिक्रमण हटने से चौड़ी होंगी मुख्य सड़कें

​फ्लाईओवर निर्माण में सबसे बड़ी व्यावहारिक बाधा मार्ग चौड़ीकरण और अवैध कब्जों को हटाना है। 31 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान एल्गिन अस्पताल के समीप गुमटियां संचालित करने वाले दुकानदारों ने राहत की मांग की थी, जिसे अदालत ने नियमों के विपरीत मानते हुए खारिज कर दिया। इस सख्त रुख के बाद नगर निगम और प्रशासन द्वारा चिन्हित संरचनाओं पर बुलडोजर चलाने की तैयारी है। इस ब्रिज के अस्तित्व में आने से राज्य न्यायिक अकादमी, तहसील कार्यालय और प्रमुख चिकित्सालयों की ओर जाने वाले राहगीरों का आवागमन सुगम बनेगा। थ्रू-ट्रैफिक ऊपर से गुजरने के कारण भूतल की सड़कों पर दबाव काफी कम हो जाएगा।

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