जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के स्वशासी कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा कर्मचारी संघ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने कॉलेज के डीन कार्यालय के सामने जमकर नाराजगी जताई और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना था कि प्रशासन उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। संघ के पदाधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करने के लिए मजबूर होंगे। इस बार कर्मचारी अपनी मांगों को मनवाए बिना पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। संघ ने पूर्व में की गई अपनी कार्रवाइयों का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने 8 जुलाई को एक ज्ञापन सौंपकर प्रबंधन को सूचित किया था। इस ज्ञापन में उनकी विभिन्न मांगों का विस्तृत विवरण था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रबंधन को 15 दिन का समय दिया गया था। लेकिन, इतने दिन गुजर जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई, न ही कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष फैल गया और उन्हें फिर से प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। प्रदर्शन के बाद, उन्होंने फिर से अधिष्ठाता को पत्र सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया और तत्काल कार्रवाई की अपील की।
कर्मचारियों की मांगों की सूची काफी विस्तृत और महत्वपूर्ण है। उनकी पहली बड़ी मांग उन कर्मचारियों को पदोन्नति देने की है जिन्होंने 5 और 10 वर्ष की सेवा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इसके साथ ही, वे सेवा के दौरान मृत्यु होने पर या सेवानिवृत्ति के समय ग्रेच्युटी के लाभ की भी मांग कर रहे हैं। आयुष्मान योजना के सुपरवाइजरों और नोडल अधिकारियों के लिए, संघ ने हर 2 वर्ष में अनिवार्य रोटेशन की मांग उठाई है।
रुकी हुई मांगों पर अड़े कर्मचारी प्रशासन लाचार
पूर्व में पदस्थ कर्मचारियों के लंबित मानदेय का भुगतान भी एक प्रमुख मुद्दा है। एक और तत्काल मांग यह है कि पात्र कर्मचारियों को 15 अगस्त से पहले आयुष्मान प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाए। इसके अलावा, पैरामेडिकल स्टाफ को केंद्रीय लैब और ब्लड बैंक में उनकी योग्यता के अनुसार पदस्थ करने की भी मांग की गई है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इन सभी मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ, तो आगामी आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
