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बिजली कंपनियों के भृत्यों को मिले कार्यालय सहायक का पद



जबलपुर। बिजली कंपनियों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को राज्य शासन की तर्ज पर कार्यालय सहायक श्रेणी तीन के पद पर पदोन्नति दिए जाने की पुरजोर मांग की गई है। मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने ऊर्जा मंत्री प्रघुम्न सिंह तोमर, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई, ऊर्जा सचिव सह सीएमडी पावर मैनेजमेंट कंपनी और सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है। पत्र के माध्यम से उन्होंने कहा है कि वर्तमान में आपके संवेदनशील नेतृत्व और सकारात्मक सोच के चलते कर्मचारियों के हित में लगातार ऐतिहासिक निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में यह आवश्यक है कि बिजली कंपनियों में दशकों से अपनी सेवाएं दे रहे चपरासी और भृत्य पदों पर कार्यरत कार्मिकों को भी पदोन्नति का यह लाभ मिलना चाहिए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

​कार्यालय सहायक श्रेणी तीन के पदों पर पदोन्नति की मांग

​मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और जबलपुर कलेक्टर द्वारा अपने राजस्व विभाग में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी के भृत्य कर्मचारियों को पदोन्नति देकर कार्यालय सहायक श्रेणी तीन बना दिया गया है। पर्यटन विकास निगम ने दस जुलाई 2026 को क्रमांक 7926 प्रशासन-द्वितीय नियुक्ति 2026 के अंतर्गत आदेश जारी कर भृत्य के पद पर कार्यरत छः कर्मचारियों को सहायक ग्रेड तीन के पद पर पदोन्नति प्रदान की है। इन कर्मचारियों को बावन सौ से बीस हजार दो सौ रुपये वेतनमान के साथ उन्नीस सौ रुपये ग्रेड पे यानी सातवें वेतनमान का लेवल चार प्रदान किया गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि बिजली कंपनियों में कार्यरत चपरासी और भृत्य अपनी पूरी सेवा इसी मूल पद पर पूरी करके बिना किसी पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो जाते हैं। ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाली सभी छह प्रमुख कंपनियों जिनमें एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी, मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी, मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी, मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर, मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर और मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल शामिल हैं, के कर्मचारियों के लिए यह आदेश लागू किया जाना चाहिए। फेडरेशन के महामंत्री ने पूर्ण विश्वास जताया है कि ऊर्जा विभाग के उच्च अधिकारी और ऊर्जा मंत्री इस संवेदनशील मामले में त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेंगे। आदेश के जारी होने से चतुर्थ श्रेणी के इन कर्मचारियों का जीवन स्तर सुधरेगा और उनका भविष्य पूरी तरह उज्ज्वल हो सकेगा।

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